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दिल्ली में मतदाता सूची में कटौती: भाजपा के लिए चिंता का विषय

दिल्ली में हाल ही में हुई मतदाता सूची की कटौती ने भाजपा के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। 66 प्रतिशत नाम स्थायी रूप से शिफ्ट कर गए हैं, विशेषकर उन सीटों पर जहां प्रवासी और मुस्लिम मतदाता अधिक हैं। बुराड़ी और ओखला जैसी सीटों पर एक लाख से अधिक नाम कट गए हैं, जिससे भाजपा की स्थिति कमजोर होती दिख रही है। जानें इस कटौती के पीछे के कारण और इसके राजनीतिक प्रभावों के बारे में।
 

दिल्ली में मतदाता नामों की कटौती


दिल्ली में 66 प्रतिशत नाम स्थायी रूप से शिफ्ट कर गए मतदाताओं की श्रेणी में शामिल हो गए हैं, जिससे कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। भाजपा उन सीटों पर अधिक प्रभावित हुई है, जहां वह लगातार हार रही है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां प्रवासी और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक है। उदाहरण के लिए, उत्तरी दिल्ली की बुराड़ी सीट पर एक लाख 68 हजार नाम कट गए हैं।


यह सीट आम आदमी पार्टी के लिए एक मजबूत गढ़ बन चुकी है, जहां विधायक संजीव झा हैं। इसी तरह, ओखला सीट पर भी एक लाख 60 हजार नामों की कटौती हुई है, जो कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। भाजपा ने इस सीट पर 1993 से अब तक कोई जीत हासिल नहीं की है। दक्षिण दिल्ली की बदरपुर सीट पर भी डेढ़ लाख से अधिक नाम कटे हैं, जहां प्रवासी मतदाताओं की संख्या अधिक है। भाजपा ने पिछले आठ चुनावों में यहां केवल दो बार जीत हासिल की है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी इस नाम कटने की प्रक्रिया में एक पैटर्न देख रही हैं।