×

दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक: क्या बनेगा नया एजेंडा?

दिल्ली में विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन के विधेयक को विफल करने की योजना बनाई जाएगी। हाल के चुनावों के परिणामों ने विपक्षी दलों के बीच मतभेद बढ़ा दिए हैं। क्या पार्टियां आपस में मनमुटाव को सुलझा पाएंगी या कोई ठोस एजेंडा तैयार कर पाएंगी? जानें इस बैठक में क्या संभावित मुद्दे उठ सकते हैं और कांग्रेस की भूमिका क्या होगी।
 

विपक्षी गठबंधन की बैठक का आयोजन


दिल्ली में सोमवार, आठ जून को विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन के लिए लाए गए विधेयक को विफल करने के प्रयास के बाद की जा रही है। पहले विपक्ष में एक सकारात्मक माहौल था, लेकिन हाल ही में पांच राज्यों में हुए चुनावों के परिणामों ने इस मोमेंटम को कमजोर कर दिया है। कई प्रमुख विपक्षी दल चुनाव हार गए हैं और आपस में मतभेद बढ़ गए हैं।


डीएमके, जो एमके स्टालिन की पार्टी है, ने इस बैठक से खुद को अलग कर लिया है। आम आदमी पार्टी के संजय सिंह बैठक में शामिल हो सकते हैं, लेकिन उनकी पार्टी भी विपक्षी गठबंधन से अलग नजर आ रही है। अगले साल पंजाब में चुनाव होने के कारण कांग्रेस और आप एक-दूसरे के साथ नहीं दिखना चाहेंगे।


बैठक में संभावित मुद्दे

बैठक से पहले यह सवाल उठता है कि क्या पार्टियां आपस में मनमुटाव को सुलझाने में सफल होंगी या कोई ठोस एजेंडा तैयार कर पाएंगी। सीपीएम के नेता कांग्रेस से नाराज हैं, जबकि ममता बनर्जी और हेमंत सोरेन भी असंतुष्ट हैं। तेजस्वी यादव की नाराजगी का कोई खास महत्व नहीं है। अब कांग्रेस की जिम्मेदारी है कि वह नाराज पार्टियों को समझाए और आगे की राजनीति के लिए तैयार करे।


सीपीएम ने कांग्रेस को एक पत्र लिखकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। सीपीएम के महासचिव एमए बेबी ने राहुल गांधी के आरोपों पर नाराजगी जताई है, जिसमें उन्होंने केरल विधानसभा चुनाव के दौरान सीपीएम और भाजपा के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया था। चुनाव के बाद ईडी ने पिनरायी विजयन और उनकी बेटी के आवास पर छापे मारे थे।


राहुल गांधी ने इसी तरह के आरोप पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस पर भी लगाए थे। उन्होंने कहा था कि ममता बनर्जी ने भाजपा के लिए रास्ता तैयार किया। झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन की नाराजगी राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार की घोषणा को लेकर है। उनका कहना है कि कांग्रेस ने बिना उनसे बात किए प्रणव झा को उम्मीदवार बना दिया।


कांग्रेस का दृष्टिकोण

कांग्रेस का कहना है कि पिछले तीन चुनावों से राज्यसभा की सीट जेएमएम के पास जा रही थी। 2020 में हेमंत ने अपने पिता को राज्यसभा भेजा था। 2022 में सोनिया गांधी ने हेमंत से बात की थी, लेकिन हेमंत ने एकतरफा तरीके से महुआ माजी का नाम घोषित कर दिया। इस बार कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार की घोषणा की है, क्योंकि संख्या ऐसी है कि दोनों सीटें विपक्षी गठबंधन को मिल सकती हैं।


सोमवार की बैठक में इन तीनों पार्टियों के बीच सुलह की कोशिश की जाएगी।