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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: क्या है इसके पीछे की कहानी?

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। उन्होंने पहले भी इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इसे अस्वीकार कर दिया। छात्र आंदोलन के बढ़ते दबाव के बीच, आखिरकार उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और शिक्षा मंत्रालय में होने वाले बदलावों के बारे में।
 

नई दिल्ली में राजनीतिक हलचल


नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने राजनीतिक जगत में हलचल मचा दी है। हालिया जानकारी के अनुसार, उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश पहले भी की थी, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उस समय इसे अस्वीकार कर दिया था। बाद में, परिस्थितियों के बदलने पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया, और शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार प्रह्लाद जोशी को सौंपा गया।


छात्र आंदोलन के दौरान इस्तीफे का पहला प्रस्ताव

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि छात्र आंदोलन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार इस्तीफे की इच्छा जताई थी, लेकिन पार्टी ने इसे स्वीकार नहीं किया। नेतृत्व का मानना था कि केवल इस्तीफा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में प्रयास जारी रखना आवश्यक है।


#WATCH | Indore, MP | On Dharmendra Pradhan's resignation, Madhya Pradesh Minister Kailash Vijayvargiya says, "What role did they have in this protest? The children were protesting and Congress went and stood behind them. After the Bengal elections, the opposition was completely… pic.twitter.com/MCsr2UuKMv

— ANI (@ANI) July 26, 2026



दूसरी बार भी इस्तीफे की पेशकश

सूत्रों के अनुसार, 20 जुलाई को एक बैठक में धर्मेंद्र प्रधान ने फिर से इस्तीफे की पेशकश की। इस बार भी पार्टी ने उन्हें पद पर बने रहने और सुधारात्मक कदम उठाने की सलाह दी। सरकार का मानना था कि कठिन समय में जिम्मेदारी निभाना अधिक महत्वपूर्ण है।


फैसले में बदलाव का कारण

रिपोर्टों के अनुसार, 20 जुलाई के बाद छात्र आंदोलन और विरोध प्रदर्शन बढ़ने लगे। इस दौरान विभिन्न पक्षों के साथ बातचीत भी हुई। सरकार को यह जानकारी मिली कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री प्रसारित हो रही है, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा था।


इन घटनाक्रमों के बाद, सरकार ने स्थिति की समीक्षा की। बताया जा रहा है कि बढ़ते तनाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने फिर से इस्तीफे की पेशकश की, जिसे इस बार स्वीकार कर लिया गया।


प्रह्लाद जोशी को सौंपा गया शिक्षा मंत्रालय

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे मंजूरी दी। इसके साथ ही, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया। अब उनसे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे की कार्रवाई और सुधारों की उम्मीद की जा रही है।