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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: छात्रों की शक्ति का असर

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जो छात्रों के आंदोलन का परिणाम माना जा रहा है। उन्होंने एक पत्र में अपनी उपलब्धियों का जिक्र किया और कहा कि कुछ लोग युवाओं के आंदोलन का गलत फायदा उठा सकते थे। कॉकरोच जनता पार्टी ने इसे अपनी जीत बताया है, जबकि सोनम वांगचुक ने इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके प्रभाव।
 

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा


नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए अपने इस्तीफे में उन्होंने क्या लिखा, यह तो ज्ञात नहीं है, लेकिन उन्होंने 'युवा साथियों' के नाम एक दो पन्नों की चिट्ठी जारी की है। इस पत्र में उन्होंने अपनी उपलब्धियों का जिक्र किया है और कमियों को स्वीकार करने के बजाय बताया है कि उन्होंने कितना अच्छा कार्य किया। प्रधान ने कहा कि कुछ लोग युवाओं के आंदोलन का गलत फायदा उठा सकते थे, इसलिए उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया। प्रहलाद जोशी को अब शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया है।


सीजेपी की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रधान के इस्तीफे को अपनी जीत के रूप में देखा है। नीट यूजी पेपर लीक विवाद को लेकर पिछले 36 दिनों से प्रदर्शन कर रहे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस्तीफे की खबर सुनकर मंच पर घुटनों के बल बैठकर हाथ पटका और कहा, 'हमने कर दिखाया'। उन्होंने केंद्र सरकार को झुकाने का दावा करते हुए कहा कि 'वे कहते थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए'।


प्रधान का इस्तीफा और सरकार की स्थिति

यह ध्यान देने योग्य है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से यह पहली बार है जब उनकी सरकार के किसी मंत्री को बाहरी दबाव में इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने भी इस्तीफा दिया था, लेकिन उस समय यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते ऐसा हुआ था।


धर्मेंद्र प्रधान मोदी सरकार के उन कुछ मंत्रियों में से थे, जो मई 2014 से लगातार 12 साल से अधिक समय तक मंत्री रहे। उनका इस्तीफा सरकार के लिए एक चुनौतीपूर्ण निर्णय था, लेकिन छात्रों और युवाओं की शक्ति के आगे सरकार को झुकना पड़ा। दीपके ने कहा, 'मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी दो और मांगे हैं। हम ऐसे नहीं जाएंगे। कॉकरोच एक बार घुसता है, तो निकलता नहीं। जिन बच्चों ने आत्महत्या की, उनके परिवार को एक करोड़ मुआवजा मिले। पुलिसवालों पर कार्रवाई हो'।


सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया

सोनम वांगचुक ने मेदांता अस्पताल से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, 'यह लोकतंत्र की जीत है, प्रत्यक्ष लोकतंत्र... सड़कों से मिली जीत। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। सीजेपी और जेन जी को बधाई।' उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक ने 26 दिन तक भूख हड़ताल की थी और सरकार ने सबसे पहले उनके साथ समझौता करके उनकी भूख हड़ताल समाप्त कराई।