धर्मेंद्र प्रधान का संसद में भव्य स्वागत: विपक्ष ने किया विरोध
धर्मेंद्र प्रधान की संसद में वापसी
नई दिल्ली: NEET पेपर लीक के विवाद के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद छोड़ने के महज दो दिन बाद, धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को संसद में लौटे। इस बार उनका स्वागत एक विशेष तरीके से किया गया। बीजेपी और एनडीए के सांसदों ने मकर द्वार पर 'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारे लगाए और उन्हें फूल-माला, शॉल और टोपी देकर सम्मानित किया। विपक्ष ने इसे शर्मनाक करार देते हुए संसद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
NDA का हीरो जैसा स्वागत
जब प्रधान संसद पहुंचे, तो मकर द्वार पर पहले से ही बीजेपी और एनडीए के सांसद मौजूद थे। 'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारों के बीच उन्होंने हाथ जोड़कर अभिवादन किया। कई सांसदों ने पारंपरिक टोपी और शॉल भेंट कर अपना समर्थन जताया और उन्हें संसद के अंदर ले गए।
पार्टी के नेताओं का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सुधारों के लिए प्रधान को सम्मान मिलना चाहिए। उनके इस्तीफे के बावजूद एनडीए में उनका कद कम नहीं हुआ है, यही संदेश देने की कोशिश की गई। रविवार को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभाला था।
विपक्ष का विरोध और 'शिक्षा चोरी' के नारे
इस बीच, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि NEET विवाद और देशभर में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया। विपक्षी नेताओं ने 'शिक्षा चोरी' के नारे लगाए और गृह मंत्री अमित शाह से माफी की मांग की।
कांग्रेस की राज्यसभा सांसद रेणुका चौधरी ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि यह सरकार विवादित फैसलों का महिमामंडन करती है। उन्होंने बिलकिस बानो मामले का भी जिक्र किया और कहा कि 'इसमें क्या बड़ी बात है, यही तो होने की उम्मीद थी।'
प्रधान का इस्तीफा और उसके बाद की कार्रवाई
शनिवार को X पर एक पोस्ट के माध्यम से प्रधान ने अपने इस्तीफे की जानकारी दी थी। उन्होंने लिखा, 'मैंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया है। पिछले 10 दिनों की घटनाओं को देखकर मुझे दुख हुआ है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत सम्मान का मामला नहीं है।'
पेपर लीक के खिलाफ देशभर में हुए विरोध के बाद सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 23 जुलाई को पीएम नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के दोषियों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की। इसके साथ ही परीक्षा सुधार के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया और पेपर लीक रोकने के लिए कानून में बदलाव भी किए गए।
संसद में बिल पर चर्चा
यह वही दिन था जब संसद 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026' पर चर्चा करने वाली थी। इस बिल का उद्देश्य परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के तंत्र को और मजबूत करना है। इसलिए प्रधान का स्वागत और विपक्ष का विरोध दोनों एक साथ संसद में देखने को मिला। बीजेपी के लिए यह एकजुटता का संदेश था, जबकि विपक्ष के लिए यह जवाबदेही का मुद्दा बन गया।