नई राजनीतिक पार्टी का उदय: क्या है इसके पीछे का सच?
नई पार्टी का रहस्य
क्या 2014 या उससे पहले 2013 में नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल अन्ना हजारे के आंदोलन के बिना प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बन सकते थे? जब देश का युवा राहुल गांधी के साथ खड़ा था, तब अचानक एक नई पार्टी का उदय होना और 6 जून को जन्तर मन्तर पर बड़े आयोजन की तैयारी ने सबको चौंका दिया है। इसके पीछे कौन है, यह सवाल अब तक अनुत्तरित है।
जयप्रकाश नारायण से लेकर वीपी सिंह तक, अन्ना हजारे के आंदोलन तक, किसी को नहीं पता था कि इसके पीछे असली ताकत कौन है।
जब देश का युवा राहुल गांधी के साथ खड़ा था, तब अचानक एक नई पार्टी का उदय होना और 6 जून को जन्तर मन्तर पर बड़े आयोजन की तैयारी ने सबको चौंका दिया है।
लेकिन यह सवाल इतना जटिल नहीं है। जेपी के आंदोलन और उससे पहले लोहिया के गैर-कांग्रेसवाद से किसे लाभ हुआ? अंततः लाभार्थी कौन है?
संघ परिवार, जनसंघ और फिर भाजपा। क्या मोदी और केजरीवाल अन्ना के आंदोलन के बिना सत्ता में आ सकते थे? मोदी शायद कभी जवाब नहीं देंगे, लेकिन केजरीवाल अपने पापों का प्रायश्चित कर सकते हैं।
हालांकि, 12 साल की चुप्पी के बावजूद, इस नए तमाशे में उन्हें या किसी अन्य को लाया जा सकता है।
भाजपा-संघ को हमेशा एक ऐसा चेहरा चाहिए होता है जिस पर जनता का विश्वास हो। यह अजीब है कि आरएसएस सौ साल का हो गया, लेकिन ऐसा चेहरा नहीं बना सके।
लोहिया, जयप्रकाश और वीपी सिंह सभी कांग्रेस के थे। अन्ना तो एक ऐसे व्यक्ति थे जो रामलीला मैदान में आने से पहले और मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद कभी नहीं दिखे।
इस बार वह चेहरा सामने नहीं आया है जो राहुल का माहौल खराब कर सके। अभी तक अभिजीत दीपके नाम का व्यक्ति काक्रोच जनता पार्टी का संस्थापक अध्यक्ष बताया जा रहा है।
सोचिए, वह व्यक्ति भारत नहीं आया है, लेकिन उसके कई इंटरव्यू हो चुके हैं। उसकी पहचान पहले से ही करवा दी गई है।
वीपी सिंह और अन्ना को भी इसी तरह हीरो बनाया गया था। लेकिन इसके बाद युवाओं का मोहभंग हुआ।
नीट के पेपर लीक और सीबीएसई की परीक्षा में धांधलियों के बाद छात्र सचेत हुए हैं। कुछ माता-पिता भी। राहुल गांधी ने उनकी आवाज उठाई।
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा गया। देश में छात्रों के पक्ष में माहौल बना।
जब युवाओं की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित हो रहा था, तब एक टीवी एंकर ने शिक्षकों को नीचा दिखाने की कोशिश की।
इसका जवाब शिक्षकों ने दिया। यह बात सामने आई कि हमारे शिक्षक कितने जानकार हैं।
प्रधानमंत्री ने न तो इसका जवाब दिया और न ही शिक्षा मंत्री को हटाया।
इस बार 6 जून को बड़ा तमाशा होगा। अगर देश इससे बच गया, तो कुछ गंभीर मुद्दों पर बात हो सकेगी।
8 जून को इंडिया गठबंधन की बड़ी मीटिंग हो रही है। विपक्ष को देखना है कि 6 तारीख का प्रभाव उनकी मीटिंग पर न पड़े।