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नए साल में भारत की चुनौतियाँ और उम्मीदें

नए साल का स्वागत करते हुए भारत की राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों पर एक नजर डालते हैं। पिछले साल की घटनाएँ, जैसे पहलगाम में आतंकवादी हमला और अमेरिका के साथ व्यापार संधि की संभावनाएँ, ने देश की स्थिति को प्रभावित किया है। जानें कैसे घरेलू राजनीति में टकराव बढ़ रहा है और क्या उम्मीदें हैं नए साल में।
 

नए साल का स्वागत

नई सुबह और नई उम्मीदों के साथ नए साल का आगाज़ हुआ है। पिछले साल की घटनाएँ, विशेषकर अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले, जिसने 25 निर्दोष सैलानियों और एक स्थानीय व्यक्ति की जान ली, ने देश को झकझोर दिया। इसके बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत आतंकवादी ठिकानों पर कार्रवाई की, लेकिन यह कार्रवाई पाकिस्तान के साथ सीमित युद्ध में बदल गई।


पाकिस्तान का जवाब

पाकिस्तान ने भारत की कार्रवाई का जवाब दिया, जो कि पहले की बालाकोट या उरी स्ट्राइक से भिन्न था। यह स्थिति 10 नवंबर को अचानक बदल गई जब अमेरिका के राष्ट्रपति ने सीजफायर की घोषणा की। इसके बाद से उन्होंने व्यापार बंद करने और टैरिफ बढ़ाने का दबाव डालकर भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने का दावा किया।


आर्थिक चुनौतियाँ

जुलाई में राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाया, जिससे भारतीय मुद्रा में गिरावट आई और एक डॉलर की कीमत 90 रुपये से अधिक हो गई। बांग्लादेश में भारत विरोधी माहौल बन गया है, जिसका लाभ पाकिस्तान और चीन उठा रहे हैं।


राजनीतिक स्थिति

घरेलू राजनीति में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की स्थिति कमजोर हुई है, और विपक्ष ने 'वोट चोरी' का मुद्दा उठाया है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया पर अविश्वास बढ़ रहा है।


नए साल की उम्मीदें

नए साल में भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार संधियाँ की हैं, और अमेरिका के साथ व्यापार संधि की उम्मीद है। इससे भारत की आर्थिकी में सुधार होने की संभावना है। बांग्लादेश में चुनाव भी होने वाले हैं, जहाँ लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनी गई सरकार के साथ संवाद बहाल करना महत्वपूर्ण होगा।


चुनावों की तैयारी

अप्रैल और मई में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जो राजनीतिक टकराव को बढ़ा सकते हैं। पिछले कुछ समय से चुनावों में कटुता बढ़ती जा रही है, जिससे सामाजिक विभाजन भी बढ़ रहा है।


सुधारों का साल

सरकार ने पिछले साल को सुधारों का साल बताया है, जिसमें श्रम कानूनों में बदलाव और रोजगार गारंटी योजनाओं में संशोधन शामिल हैं। हालांकि, ये सभी बदलाव विपक्ष के विरोध का सामना कर सकते हैं।