नरेंद्र मोदी का ऐतिहासिक कार्यकाल: 10 जून को बनेंगे सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता
भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय
10 जून भारतीय राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण दिन साबित होने जा रहा है। इस दिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए नेताओं में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने का रिकॉर्ड स्थापित करेंगे। मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद, मोदी 4,399 दिनों का कार्यकाल पूरा करेंगे, जिससे वह पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देंगे। यह उपलब्धि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
नेहरू के रिकॉर्ड को पार करते हुए
भारत की स्वतंत्रता के बाद पहले आम चुनाव के बाद, जवाहरलाल नेहरू ने 13 मई 1952 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और 27 मई 1964 तक इस पद पर बने रहे। अब नरेंद्र मोदी 10 जून को इस आंकड़े को पार कर नया रिकॉर्ड स्थापित करेंगे। इससे पहले, उन्होंने जुलाई 2025 में इंदिरा गांधी के लगातार प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया था। मोदी का यह नया रिकॉर्ड उनकी राजनीतिक यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
बदलते भारत में नया इतिहास
नेहरू और मोदी के समय के भारत में काफी बदलाव आया है। नेहरू के समय देश की जनसंख्या लगभग 34 करोड़ थी, जबकि मोदी के प्रधानमंत्री बनने तक यह संख्या 131 करोड़ से अधिक हो चुकी थी। आज भारत की जनसंख्या 146 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। लोकतंत्र का आकार भी कई गुना बढ़ा है। पहले आम चुनाव में केवल 53 राजनीतिक दल थे, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में 744 दलों ने भाग लिया। मतदाताओं की संख्या भी 17 करोड़ से बढ़कर 83 करोड़ से अधिक हो चुकी है। इस विशाल लोकतांत्रिक ढांचे में निरंतर नेतृत्व बनाए रखना एक बड़ी उपलब्धि है।
कठिन राजनीतिक माहौल में सफलता
नेहरू के समय कांग्रेस का राजनीतिक वर्चस्व था, जबकि नरेंद्र मोदी ऐसे समय में प्रधानमंत्री रहे हैं जब क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ा है। इसके बावजूद, मोदी लगातार तीन लोकसभा चुनावों में जीत हासिल करने वाले पहले प्रधानमंत्री बने हैं। वह पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने लगातार दो पूर्ण बहुमत वाली सरकारों का नेतृत्व किया।
शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल युग में बदलाव
मोदी के कार्यकाल में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास हुआ है। 2014 से 2026 के बीच, आईआईटी की संख्या 16 से बढ़कर 23 और आईआईएम की संख्या 13 से 21 हो गई। इसी अवधि में एम्स संस्थानों की संख्या 7 से बढ़कर 23 तक पहुंच गई। शासन व्यवस्था भी पूरी तरह बदल चुकी है। नेहरू के समय में न तो निजी समाचार चैनल थे और न ही सोशल मीडिया का दबाव। वहीं, मोदी का कार्यकाल डिजिटल निगरानी और तेज सूचना प्रवाह के बीच गुजरा है। ऐसे माहौल में यह रिकॉर्ड बनाना भारतीय राजनीति में एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है.