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नितिन गडकरी ने E20 ईंधन नीति पर भ्रामक पोस्ट के खिलाफ उठाया कानूनी कदम

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने E20 एथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति से जुड़े भ्रामक दावों के खिलाफ कानूनी कदम उठाया है। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में मेटा, गूगल और एक्स के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर करने की अनुमति प्राप्त की है। गडकरी का कहना है कि सोशल मीडिया पर उनके और उनके परिवार के खिलाफ गलत जानकारी फैलाई जा रही है, जो उनकी छवि को नुकसान पहुंचा रही है। जानें इस मामले में क्या हुआ और E20 नीति का महत्व क्या है।
 

केंद्रीय मंत्री का कानूनी कदम


नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर उनके और उनके परिवार के खिलाफ E20 एथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति से जुड़े आर्थिक लाभ के झूठे दावों और डीपफेक सामग्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें मेटा, गूगल, एक्स (X) सहित अन्य के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर करने की अनुमति दी है।


याचिका में उठाए गए मुद्दे

गडकरी ने अपनी याचिका में कहा है कि सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट और वीडियो में गलत तरीके से यह दावा किया जा रहा है कि E20 नीति से उन्हें और उनके परिवार को आर्थिक लाभ हुआ है। उनका कहना है कि ये आरोप पूरी तरह से निराधार और भ्रामक हैं, जो उनकी छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।


याचिका में यह भी कहा गया है कि कुछ ऑडियो और वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से इस तरह से तैयार किया गया है कि उनमें उनकी आवाज और चेहरा दिखाया गया है, जबकि इसके लिए उनकी अनुमति नहीं ली गई।


E20 नीति का महत्व

E20 नीति के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का प्रावधान है। सरकार का उद्देश्य ईंधन आयात पर निर्भरता को कम करना और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को घटाना है। हालांकि, कुछ वाहन मालिकों ने पुराने मॉडल की गाड़ियों में E20 पेट्रोल के उपयोग को लेकर सवाल उठाए हैं।


इसके बावजूद, नितिन गडकरी इस नीति का समर्थन करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने आलोचकों को चुनौती दी थी कि यदि E20 पेट्रोल से किसी वाहन को नुकसान हुआ है, तो उसका एक भी प्रमाण पेश किया जाए।


कंटेंट क्रिएटर्स पर कार्रवाई

इस मामले से पहले, महाराष्ट्र में कुछ कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ भी शिकायतें दर्ज की गई थीं। उन पर आरोप था कि उन्होंने E20 ईंधन और नितिन गडकरी के बारे में भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री सोशल मीडिया पर साझा की, जिससे लोगों में भ्रम फैल सकता है।


शिकायत में कुछ यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया अकाउंट्स का भी उल्लेख किया गया था, जिन पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया गया। अब बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सिविल मुकदमा दायर करने की अनुमति मिलने के बाद इस मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।