निशांत कुमार की बिहार यात्रा: राजनीतिक रणनीति का नया अध्याय
निशांत कुमार की यात्रा का उद्देश्य
नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार तीन मई से बिहार की यात्रा पर निकलने वाले हैं। यह यात्रा पश्चिम चंपारण से प्रारंभ होगी, ठीक उसी तरह जैसे उनके पिता ने की थी। नीतीश ने अपने दो दशकों के शासन में कई यात्राएं की हैं, जिनसे उन्हें राजनीतिक लाभ मिला और जनता में विश्वास बना। हालांकि, निशांत की यात्रा का उद्देश्य केवल राजनीतिक है, न कि जनसमर्थन प्राप्त करना।
इस यात्रा का मुख्य मकसद यह है कि नीतीश की टीम और परिवार के कुछ सदस्य मानते हैं कि निशांत को उप मुख्यमंत्री के पद से शुरुआत नहीं करनी चाहिए, बल्कि उन्हें सीधे मुख्यमंत्री बनना चाहिए। यह भी कहा जा रहा है कि नीतीश की सहमति से यह यात्रा आयोजित की जा रही है।
भाजपा पर दबाव बनाने की रणनीति
इसका मतलब यह है कि जनता दल यू के एक समूह भाजपा पर दबाव बनाए रखना चाहता है। वे भाजपा को सहज नहीं होने देना चाहते हैं। जनता दल यू के पास 85 विधायक हैं, लेकिन निशांत अभी विधायक दल के नेता बने हैं और संगठन में उनकी कोई भूमिका नहीं है। संगठन की कमान अभी भी नीतीश कुमार के हाथ में है।
आने वाले समय में यात्रा के माध्यम से निशांत को नेता बनाने का प्रयास किया जाएगा, और उन्हें पहले कुर्मी समुदाय का नेता बनाया जाएगा। यह भाजपा पर दबाव बनाने की एक रणनीति है। नीतीश ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि भाजपा के भीतर कोईरी या कुर्मी नेता उभर न सकें। यदि भाजपा बंगाल में सफल नहीं होती है, तो बिहार में जनता दल यू का दबाव और बढ़ सकता है।