नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा, बिहार में नई सरकार का रास्ता साफ
नीतीश कुमार का इस्तीफा
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को लोक भवन में राज्यपाल सैयद अता हसनैन को अपना इस्तीफा सौंपा। इस कदम के साथ ही बिहार में एनडीए के तहत नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और मंत्री विजय चौधरी ने मुख्यमंत्री आवास से निकलकर लोक भवन की ओर प्रस्थान किया, जहां उन्होंने अपना इस्तीफा प्रस्तुत किया।
भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार
इस बीच, यह चर्चा है कि बिहार में पहली बार भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है, हालांकि अभी तक नए मुख्यमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। भाजपा के प्रदेश कार्यालय को सजाया गया है और पार्टी विधायक दल की बैठक भी आयोजित की जाएगी। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को नए मुख्यमंत्री के लिए प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर
नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ उनके नेतृत्व का युग समाप्त होने की बात की जा रही है। पिछले साल नवंबर में विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिली जीत के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर चार दशकों का है और हाल ही में राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद से उनके दिल्ली की राजनीति में जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं।
राजनीतिक यात्रा की शुरुआत
उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से भी इस्तीफा दिया है। उनकी राजनीतिक यात्रा 1985 में जनता दल से शुरू हुई थी, जब उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। 1994 में, नीतीश ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ एक महत्वपूर्ण विद्रोह में भाग लिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया।
नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बनने का सफर
नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बनने का पहला अवसर 2000 में आया, लेकिन गठबंधन में संख्याबल की कमी के कारण उनकी सरकार केवल सात दिन तक ही चल सकी। 2005 में उन्होंने लालू प्रसाद यादव के 15 साल के शासन को समाप्त करते हुए बिहार में 'नए दौर' की शुरुआत की। नीतीश कुमार ने लगभग दो दशकों तक बिना किसी गंभीर राजनीतिक चुनौती के शासन किया।