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नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए भरा नामांकन, मुख्यमंत्री पद छोड़ने की तैयारी

नीतीश कुमार, जो दो दशकों से बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं, ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया है। इस कदम के साथ, भाजपा नई सरकार बनाने की योजना बना रही है। नीतीश के बेटे निशांत कुमार भी पार्टी में शामिल होने वाले हैं। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में और क्या हो रहा है बिहार में।
 

नीतीश कुमार का नया राजनीतिक कदम

पटना। नीतीश कुमार, जो दो दशकों से बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं, अब राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में अपना नामांकन भरा। नीतीश ने एक विस्तृत पोस्ट के माध्यम से अपनी इच्छा व्यक्त की कि वे संसद के उच्च सदन में जाना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नई सरकार को उनका पूरा समर्थन प्राप्त होगा।


भाजपा की संभावित मुख्यमंत्री नियुक्ति

यह अनुमान लगाया जा रहा है कि नीतीश कुमार की जगह भाजपा अपना मुख्यमंत्री नियुक्त करेगी। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, भाजपा का मुख्यमंत्री और जनता दल यू की ओर से दो उप मुख्यमंत्री हो सकते हैं। नई सरकार के गठन से पहले, जनता दल यू ने गृह मंत्रालय की मांग की है, जो वर्तमान में भाजपा के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास है। इस बीच, नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के जनता दल यू में शामिल होने की खबर है, जो आठ मार्च को होगा। उनकी भूमिका के बारे में भी चर्चा चल रही है, और वे उप मुख्यमंत्री बन सकते हैं।


नामांकन की प्रक्रिया और विरोध

गुरुवार को नामांकन के अंतिम दिन, नीतीश कुमार के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नतिन नबीन और एनडीए के अन्य उम्मीदवारों ने भी नामांकन भरा। राष्ट्रीय जनता दल के निवर्तमान सांसद अमरेंद्रधारी सिंह ने भी अपना पर्चा दाखिल किया, जिससे चुनाव निर्विरोध नहीं हो सका। अब 16 मार्च को मतदान के बाद विजेताओं की घोषणा की जाएगी।


नीतीश कुमार के नामांकन को लेकर कई दिनों से सस्पेंस बना हुआ था। जब उनके नामांकन की खबरें आईं, तो जनता दल यू के नेता और कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास के बाहर इकट्ठा हो गए और विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं के इस प्रदर्शन के कारण निशांत कुमार की पार्टी में शामिल होने की योजना टल गई।


अमित शाह का नीतीश कुमार के कार्यकाल पर बयान

नीतीश कुमार के नामांकन के बाद, अमित शाह ने कहा कि उनका कार्यकाल बिहार के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा। उन्होंने कहा कि नीतीश ने बिहार के विकास को गति दी और राज्य को जंगलराज से मुक्त किया। शाह ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार ने अपने लंबे राजनीतिक करियर में कभी भी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं झेला, जो कि एक असाधारण उपलब्धि है।