नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली, बिहार सरकार में बदलाव
भाजपा के हाथों में गई बिहार सरकार की कमान
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जो जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, ने आज राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। यह कदम उनके लिए एक नई शुरुआत है, जो उनकी इच्छा को पूरा करता है कि वे भारत के सभी विधायी सदनों में सेवा करें।
नीतीश ने बिहार विधान परिषद से दिया इस्तीफा
जेडीयू के अध्यक्ष के रूप में चुने जाने के बाद, नीतीश ने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा परिषद के सभापति को सौंपा गया। इस बदलाव के साथ, बिहार सरकार की कमान अब भाजपा के हाथों में चली गई है, जो आगामी चुनावों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
दिल्ली में आज बिहार बीजेपी नेताओं की अहम बैठक
दिल्ली में बिहार बीजेपी नेताओं की एक उच्च-स्तरीय बैठक हो रही है, जिसमें नए राज्य नेतृत्व के लिए रणनीति पर चर्चा की जा रही है। नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुने गए थे, और उनके साथ एनडीए के चार अन्य उम्मीदवार भी चुने गए।
छह महीने तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं नीतीश
संविधान के अनुसार, नीतीश अगले छह महीने तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। उन्हें सांसद चुने जाने के 14 दिन के भीतर एमएलसी पद से इस्तीफा देना आवश्यक था। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक ही समय में एमएलए/एमएलसी और सांसद दोनों पदों पर नहीं रह सकता।
अनुच्छेद 101 का खंड (2) में प्रावधान
अनुच्छेद 101 के खंड (2) में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति संसद और किसी राज्य के विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं हो सकता। यदि कोई व्यक्ति दोनों सदनों का सदस्य चुन लिया जाता है, तो राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार, संसद में उसकी सीट रिक्त हो जाएगी, जब तक कि उसने पहले ही राज्य के विधानमंडल में अपनी सीट से इस्तीफा न दे दिया हो।