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नीतीश कुमार ने विधान परिषद से दिया इस्तीफा, राज्यसभा में शामिल होने की तैयारी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद से इस्तीफा देकर राज्यसभा में शामिल होने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। यह कदम उनके लंबे राजनीतिक सफर का एक महत्वपूर्ण मोड़ है। नीतीश कुमार ने पहले विधान परिषद, विधानसभा और लोकसभा में सदस्यता हासिल की है। अब वे राज्यसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। जानें उनके राजनीतिक करियर और भविष्य की योजनाओं के बारे में इस लेख में।
 

मुख्यमंत्री का इस्तीफा

दिल्ली: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उठाया गया है। नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुने गए थे और 10 अप्रैल को वे इसकी सदस्यता ले सकते हैं।


संविधान का पालन

संविधान के अनुसार, राज्यसभा के लिए चुने जाने के 14 दिनों के भीतर विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो राज्यसभा की सदस्यता अपने आप समाप्त हो जाती है। मुख्यमंत्री ने इस संवैधानिक प्रावधान का पालन करते हुए 30 मार्च को इस्तीफा सौंपा। उन्हें 16 मार्च को चुनाव प्रमाण-पत्र भी मिल चुका था।


नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर

नीतीश कुमार ने पहली बार 2006 में विधान परिषद के सदस्य के रूप में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने 2012, 2018 और 2024 में भी सदस्यता ली। विधान परिषद की सदस्यता का कार्यकाल छह वर्ष का होता है। उनके टर्म इस प्रकार रहे: 2006-2012, 2012-2018, 2018-2024 और 2024 से अब तक। आज इस्तीफा देकर उन्होंने इस लंबे सफर को समाप्त किया है।


मुख्यमंत्री पद की स्थिति

नवंबर 2005 में बिहार की सत्ता संभालने के बाद से नीतीश कुमार ने हमेशा विधान परिषद के माध्यम से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। उन्होंने कभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा। 1985 में हरनौत से विधायक चुने जाने के बाद वे लोकसभा सदस्य भी रहे और केंद्र में मंत्री पद भी संभाला। लेकिन बिहार में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने विधानसभा की बजाय विधान परिषद को प्राथमिकता दी।


राज्यसभा में शामिल होने का अवसर

राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद नीतीश कुमार अब चारों सदनों के सदस्य बन जाएंगे। उन्होंने पहले विधानसभा (विधायक), फिर लोकसभा (सांसद), उसके बाद विधान परिषद और अब राज्यसभा की सदस्यता हासिल की है। यह उनके राजनीतिक करियर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।


भविष्य की योजनाएँ

विधान परिषद की सदस्यता छोड़ने के बाद नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद भी छोड़ना होगा। हालांकि, संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, वे छह महीने तक बिना विधान परिषद या विधानसभा की सदस्यता के मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। इस दौरान उन्हें विधानसभा चुनाव लड़कर सदस्यता प्राप्त करनी होगी या कोई अन्य विकल्प अपनाना होगा।


राजनीतिक जीवन का नया अध्याय

1985 से शुरू हुए नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर में राज्यसभा जाना एक नया अध्याय जोड़ रहा है। लंबे समय तक विधान परिषद पर निर्भर रहने के बाद अब वे ऊपरी सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। 10 अप्रैल को राज्यसभा की सदस्यता लेने के साथ ही उनके राजनीतिक जीवन का यह नया चरण शुरू होगा।