नेपाल ने अमेरिका के हेलीकॉप्टर प्रस्ताव को ठुकराया, नई रणनीति की ओर बढ़ा
अमेरिका का हेलीकॉप्टर प्रस्ताव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेपाल की सेना को छह नए लड़ाकू हेलीकॉप्टर देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, काठमांडू से आ रही खबरों के अनुसार, नेपाल इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। बालेन शाह की बढ़ती लोकप्रियता और वर्तमान सरकार की स्थिति ने अमेरिका को चिंतित कर दिया है। क्या नेपाल अब किसी भी बाहरी ताकत के प्रभाव में नहीं आना चाहता? रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने नेपाली सेना को बेल हेलीकॉप्टर देने का प्रस्ताव भेजा है।
अमेरिका की मंशा
अमेरिका का दावा है कि वह नेपाल की आपदा प्रबंधन और सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करना चाहता है। हेलीकॉप्टर आपातकालीन स्थितियों में उपयोगी होंगे। लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई भी चीज मुफ्त नहीं होती। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन इस प्रस्ताव के माध्यम से नेपाल की सेना पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। नेपाल, जो चीन और भारत के बीच स्थित है, अमेरिका चाहता है कि उसकी सेना के पास अमेरिकी उपकरण हों ताकि भविष्य में उसकी निर्भरता चीन पर कम हो सके।
नेपाल की चिंताएं
नेपाल का मानना है कि हेलीकॉप्टर तो मुफ्त में मिल जाएंगे, लेकिन उनकी देखभाल और रखरखाव का खर्च उनकी अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकता है। नेपाल को यह चिंता है कि इन हेलीकॉप्टरों का संचालन इतना महंगा होगा कि यह सेना के बजट को प्रभावित कर सकता है। बालेन शाह की राष्ट्रवादी राजनीति ने युवाओं में एक नई लहर पैदा की है, जो किसी भी विदेशी सहायता के खिलाफ है। सरकार को डर है कि अमेरिका से सैन्य सहायता लेने पर जनता इसे संप्रभुता के लिए खतरा मान सकती है।
नेपाल का काउंटर प्रस्ताव
नेपाल ने अमेरिका को केवल मना नहीं किया, बल्कि एक काउंटर प्रपोजल भेजने की योजना भी बनाई है। नेपाल का कहना है कि उन्हें छोटे हेलीकॉप्टर नहीं चाहिए, बल्कि भारी परिवहन विमान जैसे C130 हरकुलिस की आवश्यकता है। नेपाल का तर्क है कि यह एक पहाड़ी देश है, जहां भूकंप और भूस्खलन जैसी आपदाएं अक्सर आती हैं। छोटे हेलीकॉप्टर पहले से ही उपलब्ध हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर राहत सामग्री के लिए बड़े विमानों की आवश्यकता है।