नेपाल में बाढ़ से प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं के श्रमिकों की दर्दनाक कहानी
बाढ़ के कहर से बचने की कोशिश
जब बाढ़ ने निचले क्षेत्रों में सब कुछ अपने साथ बहा लिया, तब शिव गिरि और उनके छह साथी केवल पहाड़ी की ओर चढ़ने के लिए मजबूर थे। रसुवा में स्थित मैलुंग जलविद्युत परियोजना से भागते हुए, उन्होंने अपने सामने घरों और बस्तियों को पानी में बहते देखा। गिरि ने एक स्थानीय समाचार वेबसाइट को बताया कि उनके कई सहकर्मी और एक रिश्तेदार बाढ़ में लापता हो गए।
जंगल के रास्ते कठिन यात्रा
तिमुरे और धुंचे शहरों के बीच के रास्ते बंद होने के कारण, इस समूह ने जंगल के रास्ते लगभग 12 घंटे पैदल चलकर एक गुफा में रात बिताई। यह घटना नेपाल में बाढ़ से प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं से बचकर निकले लोगों के भयानक अनुभवों में से एक है। राहत और बचाव दल 26 अगस्त से लापता 933 श्रमिकों की खोज में जुटे हैं।
सुरंगों में फंसे लोग
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, 600 से अधिक लोग सुरंगों में फंसे हो सकते हैं। प्राधिकरण ने सोमवार को बताया कि अब तक 279 लोगों को सुरंगों से सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारत और चीन की विशेषज्ञ टीम भी नेपाल के राहत कार्यों में शामिल हो गई है।
सुरक्षित निकासी की कहानी
गिरी ने बताया कि अगले दिन उनका समूह परियोजना स्थल की ओर आया और वहां मौजूद राहत कर्मियों को अपनी स्थिति के बारे में बताया। अंततः नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर ने उन्हें काठमांडू पहुंचाया, जहां त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।
बाढ़ के समय की चुनौतियाँ
अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में कार्यरत सिविल इंजीनियर संदीप राणा ने बताया कि जब वे कार्यालय में थे, तब आपातकालीन सायरन बजा। कर्मचारियों को अपने निर्धारित स्थान पर पहुंचने से पहले ही बाढ़ की सूचना मिली। समूह ने ऊंचाई की ओर चढ़ाई शुरू की और अंततः सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए।
सुरंग में फंसे श्रमिकों की कहानी
रामचंद्र नामक एक जीवित बचे व्यक्ति ने बताया कि जब सुरंग में पानी भरने लगा, तब वह और उनके पांच साथी सुरंग के निकास द्वार से दूर थे। उन्होंने खुद को बचाने के लिए सुरंग की छत पर लगी सीढ़ी को पकड़ लिया और लगभग छह घंटे तक चढ़ते रहे।
आपदा का भयावह प्रभाव
नेपाल के जलविद्युत गलियारे में इस आपदा का गंभीर रूप लगातार सामने आ रहा है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई बाढ़ ने 26 अगस्त को उत्तरी और मध्य नेपाल के शहरों में तबाही मचाई। इस आपदा में सैकड़ों लोगों की जान गई और हजारों लोग अब भी लापता हैं।