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नेपाल में युवाओं का बालेंद्र शाह के खिलाफ प्रदर्शन तेज

नेपाल में जेन-जी के युवाओं का गुस्सा बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। पिछले जेन-जी आंदोलन में युवाओं ने शाह को सत्ता में लाया था, लेकिन अब उनकी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। गणेश नेपाली की आत्मदाह की घटना ने इस गुस्से को और भड़काया है। सरकार के बेदखली अभियान के कारण हजारों लोग बेघर हो गए हैं, जिससे असंतोष और बढ़ गया है। क्या बालेंद्र शाह इस्तीफा देंगे? जानिए इस लेख में।
 

नेपाल में बढ़ता युवा विरोध

काठमांडू: नेपाल में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के प्रति जेन-जी का असंतोष बढ़ता जा रहा है। हाल ही में युवाओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों ने इस गुस्से को स्पष्ट रूप से दर्शाया। पिछले जेन-जी आंदोलन में, नेपाल के युवाओं ने केपी ओली की सरकार को गिराकर बालेंद्र शाह को सत्ता में लाया था। हालांकि, शाह की सरकार से लोगों की उम्मीदें अधिक थीं, लेकिन उनके निर्णयों के कारण नाराजगी बढ़ने लगी है, जिसके परिणामस्वरूप जेन-जी फिर से सड़कों पर उतर आया है।


सत्ता में आने के चार महीने के भीतर ही प्रधानमंत्री शाह की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। उनकी पार्टी, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी), के भीतर भी असंतोष की लहर देखी जा रही है। इस बीच, 25 वर्षीय युवक गणेश नेपाली की मौत ने लोगों के गुस्से को और भड़काया है।


मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, झुग्गी बस्तियों पर चल रहे बुलडोजर एक्शन, सरकारी सुरक्षा में खड़ी गाड़ी द्वारा मीडिया गेट को अवरुद्ध करना और गणेश नेपाली द्वारा आत्मदाह का मामला लोगों के गुस्से का कारण बना है। अब नेपाल में एक बार फिर से प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग उठने लगी है।


अप्रैल से सरकार के बेदखली अभियान के दौरान काठमांडू में 2,600 से अधिक अवैध घरों को गिराया गया है, जिससे 15,000 से ज्यादा लोग बेघर हो गए हैं। लोगों का कहना है कि बिना किसी ठोस विकल्प के उनके घरों को छीन लिया गया है। इस कदम के कारण बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं प्रभावित हुए हैं।


शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया गया।


गुस्सा तब और बढ़ गया जब काठमांडू पुलिस ने पार्किंग नियम तोड़ने पर गणेश नेपाली नाम के राइड शेयरिंग ड्राइवर की मोटरसाइकिल का पहिया दबा दिया, जिसके बाद उसने आत्मदाह कर लिया।


नेपाल में बेरोजगारी एक पुराना मुद्दा है। पिछले साल सितंबर में हुए जेन-जी आंदोलन के दौरान भी यह युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा। वर्तमान सरकार पर आरोप है कि नए बजट और आर्थिक नीतियों में बेरोजगारी से निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इसके अलावा, देश के किसान भी सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।


जेन-जी आंदोलन के दौरान युवाओं को बड़े सपने दिखाए गए थे। हालांकि, शाह सरकार के शुरुआती फैसले अब सुर्खियों में नहीं हैं। देश चलाना, लोगों की जरूरतों को समझना और उनके समाधान निकालना केवल वादों से कहीं अधिक है। बालेंद्र शाह की सरकार वर्तमान में कई मोर्चों पर कठघरे में खड़ी नजर आ रही है।


अगर बालेंद्र शाह इस्तीफा देते हैं, तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। नेपाली राजनीति में अस्थिरता का इतिहास रहा है, और पिछले कई वर्षों में किसी भी प्रधानमंत्री ने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया है।