नेहरू और पटेल की विरासत: क्या मोदी ने इतिहास को भुला दिया?
नेहरू और पटेल का योगदान
नेहरू और पटेल ने भारत को एकजुट किया था। 560 से अधिक रियासतों का विलय कर देश को एक बनाया। यदि नेहरू को नजरअंदाज किया जाए, तो क्या पटेल का योगदान भी कमतर होगा?
हालांकि, आज की राजनीति में 1952 से पहले की सरकारों को मान्यता नहीं दी जा रही है। ऐसे में पटेल का गृहमंत्री होना कैसे संभव है?
बधाई किसे दी जाए? क्या यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत उपलब्धि है या भाजपा की? मोदी इसे अपने रिकॉर्ड के रूप में पेश कर रहे हैं। लेकिन क्या भाजपा का नाम इस बड़े प्रचार में कहीं है?
अटल बिहारी वाजपेयी, जो भाजपा के पहले प्रधानमंत्री थे, का योगदान क्यों भुला दिया गया है? वाजपेयी ने मील का पत्थर स्थापित किया था और उनकी राजनीति में उनकी मेहनत का बड़ा योगदान था।
मोदी का समर्थन करने वाले लोग यह कहते हैं कि अब मोदी को संघ या भाजपा की जरूरत नहीं है, बल्कि संघ और भाजपा को उनकी जरूरत है। क्या मोदी में कोई विशेष योग्यता है जो अन्य भाजपा नेताओं में नहीं है?
कांग्रेस अपने पुराने नेताओं को कभी नहीं भूलती। नेहरू, इंदिरा, और मनमोहन सिंह का योगदान हमेशा याद रखा जाता है।
भारतीय राजनीति में यह एक बड़ा अंतर है। कांग्रेस अपने नेताओं के योगदान को मानती है, जबकि भाजपा अपने नेताओं को भुला देती है।
नेहरू और पटेल ने देश को एकजुट किया था, लेकिन आज की राजनीति में उनके योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है।
क्या यह सही है कि हम नेहरू के कार्यों को भुला दें? क्या मोदी का कार्यकाल केवल हिंदू-मुसलमान के मुद्दों पर आधारित है?
नेहरू का नाम मिटाया नहीं जा सकता। उनके योगदान को भुलाने की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन यह असंभव है।