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नौतनवा में अधिवक्ताओं ने अपर आयुक्त को सौंपा ज्ञापन, मांगी बुनियादी सुविधाएं

नौतनवा तहसील में बुधवार को अधिवक्ताओं ने अपर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने बुनियादी सुविधाओं की मांग की। अधिवक्ताओं का कहना है कि वर्षों से सुविधाओं की कमी के कारण न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है। ज्ञापन में सड़क मरम्मत, पथ प्रकाश व्यवस्था, और विश्राम बेंच के निर्माण की मांग की गई। उपनिबंधक के स्थानांतरण में देरी को लेकर भी अधिवक्ताओं ने रोष व्यक्त किया। प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की उम्मीद जताई गई है।
 

नौतनवा तहसील में अधिवक्ताओं की मांगें


महराजगंज :: नौतनवा तहसील परिसर में बुधवार को उस समय हलचल मच गई जब अपर आयुक्त (प्रशासन) गोरखपुर मंडल, जयप्रकाश, वार्षिक निरीक्षण के लिए पहुंचे। उनके आगमन की सूचना मिलते ही रेवेन्यू बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने अध्यक्ष राजेश कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में एकत्र होकर पाँच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रस्तुत किया।


इस ज्ञापन में मुख्य रूप से तहसील परिसर में सड़क मरम्मत, पथ प्रकाश व्यवस्था, समरसेबल की सुविधा, अधिवक्ताओं के बैठने के लिए आवास और शेड, तथा अधिकारियों और अधिवक्ताओं के लिए विश्राम बेंच का निर्माण करने की मांग की गई। अधिवक्ताओं ने कहा कि वर्षों से बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है, जिसे तुरंत सुधारने की आवश्यकता है।


वहीं, उपनिबंधक के खिलाफ चल रहे विवाद को लेकर रेवेन्यू बार एसोसिएशन के कनिष्ठ उपाध्यक्ष नागेन्द्र प्रसाद शुक्ला, जो पिछले 125 दिनों से क्रमिक अनशन पर हैं, ने भी अपर आयुक्त को अलग से पत्र सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा द्वारा शासन को भेजे गए दो स्पष्ट संस्तुति पत्रों के बावजूद संबंधित उपनिबंधक का स्थानांतरण अब तक नहीं किया गया है, जिससे अधिवक्ताओं में रोष व्याप्त है।


निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी नौतनवा, नवीन प्रसाद, तहसीलदार कर्ण सिंह, नायब तहसीलदार शौरभ श्रीवास्तव, जिला शासकीय अधिवक्ता महेंद्र नाथ त्रिपाठी सहित कई अधिकारी और वरिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित रहे।


इस कार्यक्रम में अधिवक्ता रविंद्र नाथ त्रिपाठी, दयानंद यादव, सूर्यनाथ मिश्रा, मनोज कुमार मिश्रा, अखिलेश उपाध्याय, अनिल कुमार शर्मा (पूर्व मंत्री), राजीव कुमार सिंह, विजेंद्र पांडे, मुकेश तिवारी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता और बार सदस्य शामिल हुए।


अधिवक्ताओं ने आशा व्यक्त की कि प्रशासन उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई करेगा, अन्यथा आंदोलन की रणनीति को तेज किया जाएगा।