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पंजाब की राजनीति में बड़ा उलटफेर: सीएम मान के चचेरे भाई ने BJP जॉइन की

पंजाब की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर हुआ है जब मुख्यमंत्री भगवंत मान के चचेरे भाई ज्ञान सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का निर्णय लिया। यह कदम आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए एक बड़ा झटका है, जिसने पार्टी के भीतर हलचल पैदा कर दी है। ज्ञान सिंह का राजनीतिक सफर 2012 से शुरू हुआ था और उन्होंने AAP के लिए कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। इस बदलाव के साथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने AAP पर तीखे हमले किए हैं। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की कहानी।
 

पंजाब में राजनीतिक हलचल

चंडीगढ़: पंजाब की राजनीतिक स्थिति में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिसने आम आदमी पार्टी (AAP) में हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान को उनके परिवार से एक बड़ा झटका लगा है। उनके चचेरे भाई ज्ञान सिंह, जो AAP के गठन से लेकर अब तक उनके रणनीतिकार और कैंपेन इंचार्ज रहे हैं, ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का निर्णय लिया। चंडीगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।


ज्ञान सिंह का राजनीतिक सफर


ज्ञान सिंह का संबंध संगरूर जिले के सतौज गांव से है। उनका राजनीतिक करियर 2012 के विधानसभा चुनाव से शुरू हुआ। 2013 में आम आदमी पार्टी के गठन के बाद से उन्होंने संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह 2014 से 2022 तक संगरूर सांसद कार्यालय के प्रमुख प्रभारी रहे और 2022 के विधानसभा चुनाव में सीएम मान के चुनाव क्षेत्र धुरी के कार्यालय प्रभारी के रूप में भी सक्रिय रहे। ज्ञान सिंह की मालवा क्षेत्र में गहरी पकड़ है, जिससे BJP को इस क्षेत्र में राजनीतिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।


सीएम मान पर राजनीतिक हमले


ज्ञान सिंह की BJP में शामिल होने के मौके पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आम आदमी पार्टी और सीएम भगवंत मान पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि बंगाल चुनाव के परिणामों के बाद से पंजाब में AAP की सरकार बौखलाहट में है। सैनी ने अरविंद केजरीवाल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले वह राहुल गांधी के पीछे घूमते थे और अब पंजाब में भी AAP का सूपड़ा साफ होने वाला है। इसके साथ ही उन्होंने सीएम मान पर यह भी कहा कि AAP को भगत सिंह की तस्वीर अपने मंचों पर लगाने का नैतिक अधिकार नहीं है।