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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चुनाव प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लोकतंत्र में मतदाता के अधिकारों की अहमियत पर जोर दिया और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की आवश्यकता को रेखांकित किया। मान ने ताश के खेल के उदाहरण से समझाया कि जब नियमों का उल्लंघन होता है, तो निष्पक्षता खत्म हो जाती है। उन्होंने गुजरात चुनाव का उदाहरण देते हुए ईवीएम की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उनके बयान के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों की शुद्धता पर चर्चा फिर से शुरू हो गई है।
 

मुख्यमंत्री ने उठाए सवाल

चंडीगढ़- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक के वोट का महत्व होना चाहिए। यदि मतदाताओं के वोट काट दिए जाएं और उन्हें अपने मताधिकार का उपयोग करने का अवसर न मिले, तो लोकतंत्र का क्या अर्थ रह जाता है?


संविधान की भावना पर सवाल

‘वोट का अधिकार नहीं तो संविधान की भावना कहां बचेगी?’


मुख्यमंत्री ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की नींव है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों में नाम काटने और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल गंभीर चिंता का विषय हैं।


चुनाव प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा सदन में पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन करते हुए मान ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें किसी भी मतदाता के अधिकारों का हनन न हो। उन्होंने आशंका जताई कि मतदाता सूचियों में अनियमितताएं चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।


ताश के खेल का उदाहरण

मुख्यमंत्री ने ताश के खेल का उदाहरण देकर अपनी बात को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जब कोई खिलाड़ी हारने पर नियमों का उल्लंघन करता है, तो खेल की निष्पक्षता समाप्त हो जाती है। इसी तरह, चुनाव प्रक्रिया में भी नियमों और पारदर्शिता का पालन होना चाहिए।


चुनावों में पारदर्शिता की आवश्यकता

पश्चिम बंगाल से महाराष्ट्र तक चुनावी प्रक्रिया पर सवाल


मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल, बिहार, हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों का उल्लेख करते हुए चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि चुनावों में पारदर्शिता को लेकर उठने वाले सवालों का उचित उत्तर मिलना चाहिए, ताकि जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा बना रहे।


ईवीएम और चुनावी नतीजों पर चर्चा

ईवीएम और चुनावी नतीजों पर भी चर्चा


मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की निष्पक्षता पर उठाए गए सवालों का भी जिक्र किया। उन्होंने गुजरात चुनाव का उदाहरण देते हुए बिजली दरों में बढ़ोतरी के बावजूद भाजपा की जीत पर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं।


पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग

पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग


भगवंत मान ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और नए मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया स्पष्ट और पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक का मत महत्वपूर्ण है और किसी भी मतदाता को अपने अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।


चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल

मुख्यमंत्री के बयान के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूचियों की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही जैसे मुद्दे फिर से चर्चा में आ गए हैं। इन मुद्दों पर उठाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट हो सकती है।


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