पंजाब कैश फॉर ट्रांसफर मामले में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
पंजाब ट्रांसफर-पोस्टिंग मामला
पंजाब में 'कैश फॉर ट्रांसफर' के आरोपों की जांच अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया था, जिसमें FIR दर्ज करने और दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद, पंजाब सरकार ने इस आदेश को चुनौती देने का निर्णय लिया है। राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस बात की पुष्टि की है।
हाईकोर्ट ने CBI को जांच क्यों सौंपी?
यह मामला वकील निखिल सराफ द्वारा दायर जनहित याचिका से संबंधित है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब पुलिस को भ्रष्टाचार से संबंधित जानकारी भेजी थी, लेकिन पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त किया और कहा कि ED द्वारा साझा की गई सामग्री से यह स्पष्ट होता है कि वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। अदालत ने CBI को मामले में आपराधिक केस दर्ज करने का निर्देश दिया और दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा। अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी।
कैश फॉर ट्रांसफर के आरोप क्या हैं?
इस मामले में आरोप है कि सरकारी अधिकारियों के तबादलों और पोस्टिंग में पैसे लिए जाते थे। इसके अलावा, सरकारी नीतियों को किसी विशेष पक्ष के अनुकूल बनाने और टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने के भी आरोप लगाए गए हैं। ED द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री के अनुसार, नितिन गोहल पंजाब के मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े एक बिचौलिए के रूप में कार्य कर रहे थे। ED ने सरकारी अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और अन्य सरकारी कार्यों में प्रभाव डालने के आरोपों की जानकारी पुलिस को दी थी।
ED की चिट्ठियों के बाद विवाद शुरू
ED ने पंजाब के DGP को FIR दर्ज करने के लिए कई पत्र भेजे थे। यह मामला ED की एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान सामने आई सामग्री से संबंधित है। ED ने दावा किया था कि उसके पास WhatsApp चैट, दस्तावेज और अन्य सामग्री है, जो सरकारी कामकाज में बाहरी हस्तक्षेप के संकेत देती है। ED ने यह भी आरोप लगाया कि नितिन गोहल ने सरकारी अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग प्रभावित करने के लिए पैसे लिए। दूसरी ओर, पंजाब पुलिस ने अदालत में कहा कि ED द्वारा दी गई कुछ सामग्री स्पष्ट नहीं थी और पुलिस ने अतिरिक्त रिकॉर्ड मांगे थे।
सरकार HC के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची
हाईकोर्ट के आदेश के तुरंत बाद, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि राज्य सरकार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। उन्होंने यह भी बताया कि नवंबर 2020 में तत्कालीन पंजाब सरकार ने CBI को राज्य में जांच के लिए दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी। इस पृष्ठभूमि में, राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय ले रही है।