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पंजाब में चुनावी मुकाबला: नई पार्टियों की एंट्री और चारकोणीय संघर्ष

पंजाब में आगामी चुनाव में पांच से अधिक प्रमुख पार्टियों का मुकाबला होने जा रहा है। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा के साथ-साथ नई पार्टियों की एंट्री ने राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है। अमृतपाल सिंह की नई पार्टी और भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसदों के साथ, यह चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। जानें इस बार चुनावी रणनीतियों में क्या बदलाव आ रहा है।
 

पंजाब में चुनावी परिदृश्य


पंजाब में इस बार चुनावी मुकाबला पहले से कहीं अधिक दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि यहां पांच से अधिक प्रमुख राजनीतिक दल चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। पहले केवल कांग्रेस और अकाली दल के बीच चुनावी टकराव होता था, जिसमें भाजपा और अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ते थे। लेकिन आम आदमी पार्टी की एंट्री ने इस परिदृश्य को बदल दिया, जिससे त्रिकोणीय मुकाबले की शुरुआत हुई। पिछले चुनाव में भाजपा और अकाली दल का गठबंधन टूट गया, जिसके परिणामस्वरूप भाजपा ने अकेले चुनाव लड़ा और मुकाबला चारकोणीय हो गया।


पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 18 सीटें जीतीं और उसे लगभग 23% वोट मिले, जबकि आम आदमी पार्टी ने मुख्य मुकाबले में अच्छा प्रदर्शन किया। अकाली दल को केवल तीन सीटें मिलीं, लेकिन उसे 18% से अधिक वोट मिले। भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को सिर्फ दो सीटें मिलीं, जबकि उसे लगभग 8% वोट मिले।


इस बार भी ये चारों दल चुनावी मैदान में हैं, लेकिन नई पार्टियों की एंट्री ने स्थिति को और भी रोचक बना दिया है। अमृतपाल सिंह, जो 'वारिस पंजाब दे' नामक संगठन चलाते हैं, ने अपनी पार्टी बना ली है। वे खुद सांसद हैं और उनके साथ एक अन्य सांसद सिमरनजीत सिंह भी शामिल हो गए हैं। इसके अलावा, दो निर्दलीय सांसद भी इस बार चुनाव में उतरेंगे।


आम आदमी पार्टी से टूटकर पंजाब के छह राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हो गए हैं। यह भी चर्चा है कि कुछ विधायक भी पार्टी छोड़ सकते हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वे अलग पार्टी बनाएंगे या सीधे भाजपा में शामिल होंगे। लेकिन भाजपा का गठबंधन इस बार पहले से अधिक मजबूती से चुनाव लड़ेगा।