पंजाब में बीजेपी की नशा मुक्त यात्रा पर राजनीतिक विवाद
राजनीतिक टकराव की शुरुआत
पंजाब। बीजेपी की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ ने पंजाब में राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। 19 सितंबर को फतेहगढ़ साहिब में यात्रा के दूसरे चरण की शुरुआत से पहले विरोध प्रदर्शन और पोस्टर फाड़ने की घटनाएं सामने आई हैं। बीजेपी के खिलाफ गुरुद्वारा ज्योति स्वरूप साहिब मार्ग पर विरोधी पोस्टर लगाए गए, जबकि बीजेपी के यात्रा से संबंधित पोस्टर कई स्थानों पर फाड़ दिए गए। इन विरोधी पोस्टरों को किसने लगाया, इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।
बीजेपी का आरोप और यात्रा का उद्देश्य
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के फतेहगढ़ साहिब पहुंचने से पहले पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों भी वहां मौजूद थे। उन्होंने राज्य सरकार पर नशे की समस्या को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि नशा अब कथित तौर पर ‘होम डिलीवरी’ के जरिए लोगों तक पहुंच रहा है और इसे रोकने में सरकार असफल रही है। ढिल्लों ने बताया कि बीजेपी की यह यात्रा पांच संकल्पों के साथ शुरू की गई है और इसे जन आंदोलन में बदलने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नशे से प्रभावित परिवारों के दर्द को समझते हुए नशा उन्मूलन के लिए एक ठोस योजना बनाई जा रही है।
विरोधी पोस्टरों में उठाए गए मुद्दे
फतेहगढ़ साहिब में बीजेपी के विरोध में लगाए गए पोस्टरों में पंजाब के पानी को हरियाणा और राजस्थान को देने जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। इसके अलावा, किसान आंदोलन के दौरान रद्द किए गए कृषि कानूनों की बहाली जैसे मुद्दे भी इन पोस्टरों पर दर्शाए गए हैं। इन पोस्टरों पर प्रतिक्रिया देते हुए ढिल्लों ने इसे आम आदमी पार्टी सरकार की राजनीतिक प्रतिक्रिया बताया। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं हुई है।
यात्रा का विस्तार
18 से 21 सितंबर के बीच बीजेपी की चार ‘नशा मुक्त पंजाब यात्राएं’ विभिन्न स्थानों से शुरू हो रही हैं। इस अभियान को राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों तक पहुंचाने की योजना है।