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पंजाब विधानसभा ने पारित किया जेल सुधार बिल, 2026

पंजाब विधानसभा ने हाल ही में ‘पंजाब जेल एवं सुधार सेवाएं बिल, 2026’ को सर्वसम्मति से पारित किया है। इस विधेयक का उद्देश्य जेलों को सुधारात्मक केंद्रों में बदलना और कैदियों के पुनर्वास को सुनिश्चित करना है। मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि यह कानून कैदियों की गरिमा और उनके अधिकारों की रक्षा करेगा। इसमें विशेष प्रावधानों के साथ-साथ सुरक्षा उपायों को भी शामिल किया गया है, जिससे जेल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। जानें इस महत्वपूर्ण विधेयक के बारे में और क्या-क्या बदलाव होंगे।
 

पंजाब जेल एवं सुधार सेवाएं बिल, 2026 का पारित होना

चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा ने शुक्रवार को विशेष सत्र में ‘पंजाब जेल एवं सुधार सेवाएं बिल, 2026’ को सर्वसम्मति से मंजूरी दी। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य जेल प्रशासन प्रणाली को आधुनिक बनाना और इसे सुधारात्मक प्रथाओं के अनुरूप ढालना है।
मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने विधेयक पेश करते हुए बताया कि इस कानून का लक्ष्य जेलों को केवल हिरासत केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय सुधार, पुनर्वास और सामाजिक पुनःएकीकरण के केंद्रों में बदलना है। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानूनी ढांचा, जो औपनिवेशिक काल के कानूनों पर आधारित है, अब अप्रचलित हो चुका है और वर्तमान चुनौतियों का सामना करने में असमर्थ है।


कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि नया विधेयक कैदियों की सुरक्षित हिरासत सुनिश्चित करने के साथ-साथ एक मानवीय दृष्टिकोण पर आधारित व्यापक ढांचा प्रदान करेगा, जो कैदियों की गरिमा और उनके मूल अधिकारों की रक्षा करेगा। इसमें सुधारात्मक सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, कौशल विकास और मनोवैज्ञानिक परामर्श शामिल हैं, ताकि कैदियों को कानून का पालन करने वाले नागरिकों के रूप में समाज में पुनः स्थापित किया जा सके। डॉ. सिंह ने बताया कि विधेयक में आयु, लिंग, आपराधिक पृष्ठभूमि और जोखिम मूल्यांकन जैसे कारकों के आधार पर कैदियों के वर्गीकरण की एक मजबूत प्रणाली प्रस्तावित की गई है। संवेदनशील वर्गों, जैसे महिला कैदी, ट्रांसजेंडर कैदी, बुजुर्ग कैदी और दिव्यांग कैदी, के लिए विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिससे उनकी सुरक्षा, गरिमा और कल्याण सुनिश्चित हो सके।


सुरक्षा पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए मंत्री ने कहा कि विधेयक में खतरनाक अपराधियों, संगठित अपराध के आरोपियों और अन्य उच्च जोखिम वाले कैदियों के प्रबंधन के लिए उच्च सुरक्षा जेलों और विशेष उच्च जोखिम क्षेत्रों की स्थापना का प्रावधान है। जेल सुरक्षा को मजबूत करने और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी, बायोमेट्रिक पहचान और आधुनिक स्कैनिंग तकनीकों सहित उन्नत निगरानी प्रणालियों को एकीकृत किया जाएगा। यह विधेयक निरीक्षण, शिकायत निवारण और निगरानी के लिए संरचित तंत्र प्रदान कर जेल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी बढ़ावा देता है। राज्यभर में जेल संस्थानों के प्रभावी प्रबंधन और नीतियों के क्रियान्वयन के लिए जेल एवं सुधार सेवाओं के निदेशालय को और सुदृढ़ किया जाएगा। इसके अलावा, कैदियों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, कानूनी सहायता और संचार सुविधाओं से संबंधित प्रावधानों को भी मजबूत किया गया है। विधेयक संविधान और मानवाधिकार मानकों के अनुरूप उचित चिकित्सा उपचार, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और कानूनी सहायता तक पहुंच सुनिश्चित करता है। डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि यह कानून विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और आपराधिक न्याय प्रणाली के साथ एकीकरण जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देगा।