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पंजाब विधानसभा ने हरभजन सिंह ईटीओ के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों की निंदा की

पंजाब विधानसभा ने आज सर्वसम्मति से प्रताप सिंह बाजवा द्वारा कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणियों की निंदा की। यह मामला 6 फरवरी 2026 को जांडियाला गुरु में एक सभा के दौरान उठाया गया था। विधायक मनजीत सिंह बिलासपुर ने इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियाँ दलित समुदाय और उनके परिवार का अपमान करती हैं। सदन ने बाजवा से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की और भविष्य में ऐसे व्यवहार को रोकने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की अपील की।
 

पंजाब विधानसभा का निंदा प्रस्ताव

चंडीगढ़ - पंजाब विधानसभा ने आज विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा द्वारा कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ के खिलाफ की गई जातिवादी और अपमानजनक टिप्पणियों की सर्वसम्मति से निंदा की। यह विवाद 6 फरवरी 2026 को जांडियाला गुरु, अमृतसर में एक सार्वजनिक सभा के दौरान बाजवा के बयान से शुरू हुआ। अपने भाषण में, उन्होंने मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ, जो दलित समुदाय से हैं, के प्रति अपमानजनक टिप्पणियां कीं। सदन के सदस्यों ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां न केवल मंत्री का अपमान करती हैं, बल्कि उनके परिवार और मेहनती दलित समुदाय का भी अपमान करती हैं।


यह निंदा प्रस्ताव विधायक मनजीत सिंह बिलासपुर द्वारा सदन में पेश किया गया। उन्होंने बताया कि ये टिप्पणियां उन बैंड-ऑर्केस्ट्रा कलाकारों और दिहाड़ी मजदूरों के सम्मान को ठेस पहुंचाती हैं, जो ईमानदारी से अपनी आजीविका कमाते हैं। विधायक ने कहा कि जिम्मेदार सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को संयम बरतना चाहिए और सम्मान, समानता तथा सामाजिक सद्भावना के मूल्यों को बनाए रखना चाहिए।


निंदा प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए विधायक मनजीत सिंह बिलासपुर ने कहा कि सदन प्रताप सिंह बाजवा की 'शर्मनाक' टिप्पणियों की कड़ी निंदा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा व्यवहार एक सामंती और दलित-विरोधी मानसिकता को दर्शाता है, जो पंजाब के सामाजिक ताने-बाने और सामुदायिक सद्भाव के लिए हानिकारक है।


इस प्रस्ताव में प्रताप सिंह बाजवा से दलित समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की गई है। स्पीकर से इस मामले का संज्ञान लेने और उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की अपील की गई, ताकि भविष्य में कोई भी राजनीतिक नेता किसी व्यक्ति का उसके पेशे या जाति के आधार पर अपमान न करे। सदन द्वारा यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।