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पंजाब सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी जीरो टॉलरेंस नीति जारी

पंजाब सरकार ने भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए जीरो टॉलरेंस नीति को जारी रखा है, जिससे नागरिक बिना रिश्वत के सरकारी सेवाएं प्राप्त कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है, जिसमें कई अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। वर्ष 2025 में विजिलेंस विभाग ने 144 सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए पकड़ा और अदालतों ने कई आरोपियों को सजा सुनाई। जानें इस नीति के प्रभाव और पंजाब में भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए कदमों के बारे में।
 

भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई

-अब तक कई लोगों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया


पंजाब सरकार ने भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाने के लिए एक ठोस रणनीति अपनाई है, जिससे जनता को काफी राहत मिली है। अब पंजाब के नागरिक सरकारी कार्यालयों में बिना किसी रिश्वत के अपने कार्य आसानी से करवा पा रहे हैं। यदि कोई रिश्वत मांगता है, तो एंटी करप्शन एक्शन लाइन उसे तुरंत गिरफ्तार कर देती है। इस लाइन पर नागरिक सीधे भ्रष्टाचार की शिकायतें दर्ज कर सकते हैं। कई सरकारी सेवाओं के डिजिटल होने से भी भ्रष्टाचारियों का कामकाज ठप हो गया है।


मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान ने कहा है कि भ्रष्टाचार-मुक्त शासन उनके प्रशासन के नैतिक मूल्यों का आधार है, जो पिछले चार वर्षों में उनकी सरकार की कार्रवाइयों से स्पष्ट है। पंजाब सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो-टॉलरेंस नीति को बनाए रखा है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं गया है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश है कि भ्रष्टाचार करने वाले चाहे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों, उन्हें दंडित किया जाएगा। रिश्वतखोरी, आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग के मामलों में सैकड़ों छापेमारी की गई हैं।


इन कार्रवाइयों में पुलिस, राजस्व, नगर निगम, मंडी बोर्ड और अन्य विभागों के कई अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। इससे यह संदेश गया है कि अब कोई भी पद या प्रभाव से बच नहीं सकता। वर्ष 2025 में विभिन्न विभागों के 144 सरकारी कर्मचारियों और 43 निजी व्यक्तियों को रिश्वत लेते हुए विजिलेंस विभाग ने पकड़ा। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए विजिलेंस ब्यूरो ने 113 आपराधिक मामले दर्ज किए, जिनमें 17 गजटेड अधिकारी, 98 नॉन-गजटेड कर्मचारी और 118 निजी व्यक्ति शामिल हैं। अदालतों ने वर्ष 2025 में 34 मामलों में 63 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए एक से पांच वर्ष तक की सजा सुनाई और कुल 18.71 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।