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पवन खेड़ा का मोदी सरकार पर हमला: शिक्षा प्रणाली में धांधली और युवा आत्महत्याओं का मुद्दा

पवन खेड़ा ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में लगातार पेपर लीक हो रहे हैं और युवा आत्महत्याएं कर रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री आम पना बनाने की रेसिपी साझा कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा प्रणाली में धांधली और CBSE के कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। जानें इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने क्या कहा और कैसे यह मुद्दा देश की युवा पीढ़ी को प्रभावित कर रहा है।
 

पवन खेड़ा का प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी सरकार पर आरोप


नई दिल्ली। AICC मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश में लगातार पेपर लीक हो रहे हैं, युवा आत्महत्या कर रहे हैं, और प्रधानमंत्री आम पना बनाने की रेसिपी साझा कर रहे हैं। जो काम CBSE के बड़े इन्वेस्टिगेटर नहीं कर पाए, वह एक 19 वर्षीय एथिकल हैकर ने कर दिखाया और सरकार का पूरा तंत्र उजागर कर दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी और प्रधानमंत्री मोदी के बयानों की तुलना करें, तो स्पष्ट होगा कि जो देश की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, वे आम की किस्में गिन रहे हैं, जबकि विपक्ष को युवाओं की चिंता है।


LIVE: Press briefing by Shri @Pawankhera at AICC Office, New Delhi. https://t.co/FNs2AhcA9O

— Congress (@INCIndia) June 1, 2026



खेड़ा ने कहा कि पिछले दो वर्षों में NEET, CUET, JEE Mains, BPSC जैसी परीक्षाओं में लाखों युवा धांधली का शिकार हुए हैं। यह समस्या केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह स्कूली शिक्षा तक पहुंच गई है। पहले बोर्ड परीक्षाओं में धांधली, फिर प्रतियोगी परीक्षाओं में और अब सर्विस कमीशन में भी। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी का असली उद्देश्य क्या है? क्या वे चाहते हैं कि युवा अनपढ़ और बेरोजगार रहें?


‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ का असली अर्थ


पवन खेड़ा ने कहा कि पीएम मोदी का नारा ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ असल में ‘न पढूंगा, न पढ़ने दूंगा’ होना चाहिए। मोदी सरकार के मंत्रियों के बयानों में शिक्षा व्यवस्था या CBSE की आलोचना का एक शब्द भी नहीं है।


देश की युवा पीढ़ी के साथ खिलवाड़


उन्होंने कहा कि पूरा देश निराश है क्योंकि सरकार मौजूदा पीढ़ी के साथ खिलवाड़ कर रही है। जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से पेपर लीक के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि राहुल गांधी निराश हैं। हां, राहुल गांधी, कांग्रेस और पूरा देश निराश हैं।


पवन खेड़ा ने बताया कि पहले CBSE में छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं परीक्षक के पास जाती थीं, लेकिन अब यह प्रक्रिया बदल गई है। अब उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन करके पोर्टल पर अपलोड की जाती हैं। इस प्रक्रिया में एक कंपनी को हायर किया गया।


पहले राउंड में TCS कंपनी आई, लेकिन केवल एक कंपनी होने के कारण टेंडर नहीं हुआ। अगस्त 2025 में एक और टेंडर राउंड हुआ, जिसमें COEMPT कंपनी सामने आई। लेकिन नियमों में बदलाव कर COEMPT को टेंडर दिया गया।


उन्होंने कहा कि टेंडर में अनुभव का क्राइटेरिया हटा दिया गया और नियमों को बदलकर COEMPT को लाभ पहुंचाया गया। अब COEMPT कंपनी रंगे हाथों पकड़ी गई है, लेकिन इसे ब्लैकलिस्ट नहीं किया जाएगा।


आज राहुल गांधी ने ट्वीट कर बताया कि बच्चों को रि-इवैल्यूएशन के लिए 2,000 रुपए खर्च करने होंगे। लगभग 5 लाख बच्चों ने इसके लिए आवेदन किया है, जिससे 100 करोड़ का आंकड़ा बनता है। इसका मतलब है कि गलती कंपनी की है, लेकिन भुगतना बच्चों को पड़ रहा है।


साइबर सुरक्षा की अनदेखी


मोदी सरकार को साइबर सुरक्षा की कोई चिंता नहीं है। बच्चों की जानकारी जैसे आंसर शीट, पेमेंट रिकॉर्ड, फोन नंबर, ई-मेल एड्रेस पब्लिक डोमेन में आ गई हैं।


COEMPT कंपनी से धर्मेंद्र प्रधान का संबंध


अब लोग पूछ रहे हैं कि COEMPT कंपनी से धर्मेंद्र प्रधान का क्या संबंध है? सरकार को शिकायतों का समाधान करना चाहिए, लेकिन CBSE ने एक स्क्रिप्ट बनाई और सभी स्कूलों को भेज दी।


NEET और CBSE पर जवाब मांगे


UPA-2 के दौरान शिक्षा पर बजट में 4.77% खर्च किया जाता था, लेकिन अब यह घटकर 2.50% रह गया है। यह एक सुनामी है, जिसमें हमारी पूरी पीढ़ी बर्बाद हो रही है। इसलिए मैं आपसे कहता हूं कि NEET और CBSE पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और मोदी सरकार से जवाब मांगिए।