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पवन खेड़ा ने लोकतंत्र पर हमले की चेतावनी दी, कहा- वोट चोरी का मुद्दा गंभीर है

पवन खेड़ा ने हाल ही में एक प्रेस वार्ता में लोकतंत्र पर हो रहे हमलों की गंभीरता को उजागर किया। उन्होंने वोट चोरी और चुनावी धांधली के मामलों पर चर्चा की, जिसमें विभिन्न राज्यों का उदाहरण दिया गया। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को इस स्थिति को रोकने के लिए सक्रिय होना चाहिए, लेकिन वह खुद इस समस्या में लिप्त है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह मुस्लिम वोटरों को ठुकरा रही है और चुनावी प्रक्रिया को कमजोर कर रही है। इस मुद्दे पर उनका स्पष्ट रुख है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए दोबारा मतदान की आवश्यकता है।
 

लोकतंत्र की सुरक्षा पर चिंता

नई दिल्ली। AICC के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने हाल ही में कहा कि देश एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है, जिसमें लोकतंत्र को हाइजैक करने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा आयोजित एक प्रेस वार्ता का उल्लेख किया, जिसमें विभिन्न राज्यों में 'वोट चोरी' की घटनाओं पर प्रकाश डाला गया। हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए, उन्होंने कहा कि वोट चोरी, SIR और परिसीमन का उपयोग कर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। यह एक त्रिकोणीय हमला है।



पवन खेड़ा ने आगे कहा कि जब 2024 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी को झटका लगा, तब चुनावी प्रणाली को नष्ट करने की साजिशें शुरू हुईं। उन्होंने कहा कि हमें बार-बार सवालों का सामना करना पड़ता है, लेकिन यह स्पष्ट है कि जहां-जहां कीचड़ फैला है, वहां कमल खिल गया है। यह नरेंद्र मोदी और भाजपा का एक पैटर्न है, और यदि देश ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो यह कीचड़ हर जगह फैल जाएगा।


उन्होंने कहा कि देश में 'वोट चोरी' का कीचड़ फैलाया जा रहा है, और चुनाव आयोग को इसे रोकने का कार्य करना चाहिए। लेकिन चुनाव आयोग ने हेट स्पीच और शिकायतों पर ध्यान देने के बजाय खुद उस कीचड़ में लोटने का काम किया है, जिससे लोकतंत्र को दागदार बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि हम तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ बंगाल में मजबूती से लड़े, लेकिन चुनाव परिणामों के बाद जब धांधली की बातें सामने आईं, तो राहुल गांधी ने नैतिकता के साथ अपना रुख स्पष्ट किया।


पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि जैसे महाराष्ट्र में लक्षित तरीके से लाखों वोट जोड़े गए थे, उसी तरह पश्चिम बंगाल और असम में लाखों वोटरों को हटाया गया। उन्होंने कई राज्यों के उदाहरण दिए, जो यह दर्शाते हैं कि वोटर लिस्ट और चुनावी प्रक्रिया में गंभीर समस्याएं हैं। लोकतंत्र के चौकीदार ज्ञानेश गुप्ता खुद चोरों को अपने कंधे पर बैठाकर विधानसभा ले जा रहे हैं, यह सब आपके सामने हो रहा है। यह लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय है।


उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद हिंसा का दौर शुरू हो चुका है, लेकिन इसे रोकने के बजाय दिल्ली से और भड़काया जा रहा है। वहां विरोधियों के कार्यालय जलाए जा रहे हैं, लोगों की हत्या की जा रही है, और दुकानों को तोड़ा जा रहा है। भाजपा पश्चिम बंगाल में जीत का जश्न नहीं मना रही, बल्कि गुंडागर्दी कर रही है। नरेंद्र मोदी को अपने पद के अनुरूप आचरण करना चाहिए और इस हिंसा को रोकना चाहिए।


पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि भाजपा ने मुस्लिम वोटरों को ठुकराया है, और अब जब मुस्लिम वोटरों ने एक सेक्युलर पार्टी को वोट दिया, तो भाजपा को उसमें भी शिकायत होने लगी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बाबा साहेब का संविधान ऐसी सोच की अनुमति देता है? कांग्रेस पार्टी हमेशा सभी समुदायों का प्रतिनिधित्व करती आई है, जबकि भाजपा ने एक समुदाय के खिलाफ जहर उगला है।


उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जिन मतदाताओं को वोट के अधिकार से वंचित रखा गया, उन सीटों पर जीत का मार्जिन SIR डिलीशन की संख्या से कम है। यह स्पष्ट है कि दूध का दूध और पानी का पानी हो रहा है। ऐसे में हमें लगता है कि उन सीटों पर दोबारा मतदान होना चाहिए, क्योंकि कई लोग अभी भी वोट के अधिकार का इंतजार कर रहे हैं। हमें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है कि वह संविधान के अनुसार न्याय करेगा।