पश्चिम एशिया के तनाव से वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट
वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान, अमेरिका तथा इजरायल के बीच संभावित लंबे संघर्ष की आशंकाओं ने सोमवार को वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट का कारण बना। एक दिन पहले बाजार में सुधार की कोशिश के बाद, फिर से दबाव में आ गए, जिससे भारत समेत अन्य देशों के इक्विटी मार्केट्स में तेज बिकवाली देखने को मिली।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर
विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा दिया। इसके परिणामस्वरूप, घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और Nifty 50 में बड़ी गिरावट आई, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का दबाव स्पष्ट था।
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
कारोबार के दौरान, सेंसेक्स 1387.55 अंकों (1.86%) की गिरावट के साथ 73,145.41 पर और निफ्टी 423.35 अंकों (1.83%) की गिरावट के साथ 22,691.15 पर कारोबार करता दिखा। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स 72,977.34 और निफ्टी 22,634.55 तक गिर गए थे।
निवेशकों की दौलत में कमी
निवेशकों की दौलत में भारी गिरावट
बाजार में इस तेज गिरावट के चलते BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग 8.15 लाख करोड़ घट गया। 20 मार्च को कुल मार्केट कैप 4.29 लाख करोड़ था, जो 23 मार्च को घटकर 4.20 लाख करोड़ रह गया।
बाजार में तबाही का कारण
क्यों मची है बाजार में तबाही?
इस गिरावट का मुख्य कारण मध्य पूर्व का तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति का 48 घंटे का अल्टीमेटम है। राष्ट्रपति ने ईरान को 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' खोलने की चेतावनी दी है, अन्यथा उसके ऊर्जा ठिकानों को नष्ट करने की धमकी दी है। इस खबर ने वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर चिंता पैदा कर दी है, जिससे कच्चा तेल (WTI Crude) $100 के करीब और ब्रेंट क्रूड $112.17 के पार पहुंच गया है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
FII की आक्रामक बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। पिछले 16 कारोबारी दिनों में उन्होंने लगभग 1 लाख करोड़ की शुद्ध बिकवाली की है, जो बाजार की कमजोरी का एक बड़ा कारण बनी।
सेंसेक्स के सभी शेयरों में गिरावट
सेंसेक्स के सभी शेयर लाल निशान में
सेंसेक्स के सभी 30 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा दबाव Tata Steel, Mahindra & Mahindra और HDFC Bank के शेयरों पर देखा गया।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।