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पश्चिम एशिया में संघर्ष पर पीएम मोदी का बयान: सुरक्षा और एकता की आवश्यकता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर गंभीर बयान दिया, जिसमें उन्होंने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया। उन्होंने राजनीतिक सहमति और एकता की आवश्यकता पर जोर दिया, साथ ही संघर्ष के दौरान सुरक्षित वापसी की जानकारी साझा की। पीएम ने ऊर्जा आपूर्ति के महत्व को रेखांकित करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। इस संकट के दीर्घकालिक प्रभावों के प्रति भी चेतावनी दी गई है। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर पीएम मोदी का क्या कहना है।
 

संसद में पीएम मोदी का बयान


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और ईरान से संबंधित हालात पर गहन चर्चा की। उन्होंने इसे गंभीर और चिंताजनक स्थिति बताया, यह बताते हुए कि इस क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक निवास और कार्यरत हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।


राजनीतिक सहमति की आवश्यकता

पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय एकता और राजनीतिक सहमति की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हालात को देखते हुए उन्होंने कई देशों के नेताओं से सीधा संवाद किया है और भारतीय मिशन प्रभावित क्षेत्रों में फंसे नागरिकों की सहायता में जुटा हुआ है।


भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी

प्रधानमंत्री ने बताया कि संघर्ष के आरंभ से अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया गया है। ईरान से भी लगभग 1,000 नागरिकों की वापसी हुई है, जिनमें बड़ी संख्या में मेडिकल छात्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और आवश्यकता पड़ने पर राहत और बचाव कार्यों को तेज किया जाएगा।


ऊर्जा आपूर्ति का महत्व

ऊर्जा आपूर्ति के संदर्भ में, पीएम मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह जलमार्ग भारत सहित कई देशों के लिए कच्चे तेल, गैस और उर्वरकों की आपूर्ति का मुख्य मार्ग है। मौजूदा तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, लेकिन भारत ने कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से आवश्यक आपूर्ति को सुनिश्चित किया है।


अंतरराष्ट्रीय मार्ग पर पीएम का दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मार्ग में किसी भी प्रकार की रुकावट को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की। नागरिकों, ऊर्जा ढांचे और परिवहन से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की।


एलपीजी आपूर्ति की स्थिति

एलपीजी आपूर्ति के संदर्भ में, उन्होंने बताया कि भारत अपनी लगभग 60% जरूरतों को आयात से पूरा करता है। ऐसे में अनिश्चित हालात के बीच घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है और उत्पादन बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।


संघर्ष के दीर्घकालिक प्रभाव

अंत में, प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि इस संघर्ष के दीर्घकालिक प्रभाव हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश को एकजुट रहना होगा और कुछ तत्व अफवाहें फैलाकर स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश कर सकते हैं। सरकार और जनता को मिलकर ऐसे प्रयासों को विफल करना होगा।