पश्चिम एशिया संकट: 20,000 से अधिक नाविक मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती समस्याएं
होर्मुज जलडमरूमध्य में समस्याओं का बढ़ता सिलसिला
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात ठप हो गया है। पिछले 24 घंटों में कोई भी जहाज इस जलडमरूमध्य को पार नहीं कर सका है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1600 पोत अभी भी इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे हजारों कर्मचारी संकट में हैं।
समुद्री कर्मचारियों से संबंधित कई संगठनों ने चेतावनी दी है कि खाड़ी क्षेत्र में दो महीने से अधिक समय से फंसे 20,000 से अधिक नाविक मानसिक तनाव और अकेलेपन का सामना कर रहे हैं। संघर्ष के कारण जहाजों के कप्तान, रसोइए, इंजीनियर और अन्य कर्मचारी न केवल फंसे हुए हैं, बल्कि कई बार हमलों के खतरे में भी हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, अब तक कम से कम 11 नाविकों की जान जा चुकी है।
ब्रिटेन ने युद्धपोत होर्मुज भेजा
ब्रिटेन ने घोषणा की है कि वह अपने युद्धपोत एचएमएस ड्रैगन को पश्चिम एशिया में तैनात कर रहा है। इसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा के लिए विभिन्न देशों के साथ मिलकर अभियान चलाना है। यह युद्धपोत ईरान युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद पूर्वी मेडिटेरेनियन में तैनात किया गया था, जहां इसका कार्य साइप्रस की सुरक्षा में सहायता करना था।
फ्रांस और ब्रिटेन का सहयोग
ब्रिटेन की तैनाती ऐसे समय हो रही है जब फ्रांस ने भी अपना कैरियर स्ट्राइक ग्रुप दक्षिणी लाल सागर में भेजा है। यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापार मार्ग में विश्वास बहाल करने के लिए ब्रिटेन और फ्रांस के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाता है। दूसरी ओर, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि मॉस्को ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को अपने यहां लाने और सुरक्षित रखने के लिए तैयार है।
पुतिन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि रूस ने 2015 में भी ईरान से एनरिच्ड यूरेनियम निकाला था और अब उस अनुभव को दोहराने के लिए तैयार है। उनके अनुसार, संघर्ष से जुड़े सभी पक्ष इस बात पर सहमत थे कि यूरेनियम को ईरान से बाहर भेजा जाए, लेकिन अमेरिका ने बाद में अपना रुख सख्त कर लिया।