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पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का बागी सांसदों के खिलाफ बड़ा कदम

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों के खिलाफ अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सांसदों ने जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात किया है। टीएमसी ने इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और अभिषेक बनर्जी के तीखे बयान।
 

कोलकाता में राजनीतिक विवाद का नया मोड़


कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बागी सांसदों के मुद्दे ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में एक नया विवाद उत्पन्न कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। टीएमसी का आरोप है कि जिन सांसदों ने पार्टी छोड़ने या अलग गुट बनाने का दावा किया है, उन्होंने जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात किया है और उन्हें संसद की सदस्यता बनाए रखने का अधिकार नहीं है।


टीएमसी प्रतिनिधिमंडल की स्पीकर से मुलाकात

दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष से मिलने वाले टीएमसी प्रतिनिधिमंडल में अभिषेक बनर्जी के साथ सौगत रॉय, कल्याण बनर्जी, डेरेक ओ’ब्रायन और महुआ मोइत्रा जैसे प्रमुख नेता शामिल थे। नेताओं ने स्पीकर को ज्ञापन सौंपते हुए उन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की, जिन्होंने पार्टी से अलग होकर नया राजनीतिक गुट बनाने का दावा किया है।


अभिषेक बनर्जी की पत्रकारों से बातचीत

मुलाकात के बाद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पार्टी ने 14 जून को इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजा था। उसी पत्र के आधार पर उन्हें चर्चा के लिए बुलाया गया। उन्होंने बताया कि टीएमसी ने पहले भी इस मुद्दे पर अध्यक्ष को जानकारी दी थी और अब औपचारिक रूप से अपनी आपत्तियां रखी हैं।


बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि टीएमसी के 20 सांसदों ने हाल ही में स्पीकर से मिलकर अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। उनके अनुसार, इनमें से कुछ सांसदों ने किसी अन्य राजनीतिक संगठन में विलय का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इन सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की हैं और संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी सदस्यता पर कार्रवाई की जानी चाहिए।


बागी सांसदों पर अभिषेक बनर्जी की कड़ी टिप्पणी

अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से समझौता किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ऐसे नेताओं को स्वीकार नहीं करेगी जिन्होंने अपने मतदाताओं की उम्मीदों को तोड़ा है।


इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सांसद विभिन्न एजेंसियों की जांच से बचने या अन्य राजनीतिक लाभ पाने के लिए ऐसे कदम उठा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि उनके पास इन आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत हैं और जरूरत पड़ने पर वे उन्हें अदालत में भी प्रस्तुत कर सकते हैं। इस घटनाक्रम ने टीएमसी के भीतर बढ़ते राजनीतिक तनाव और दल-बदल की बहस को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।