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पश्चिम बंगाल के सांसदों का भाजपा में शामिल होने का मामला

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी से अलग हुए 20 सांसदों में से 17 के भाजपा में शामिल होने की संभावना है। हालांकि, इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सांसद जगदीश चंद बसुनिया ने दावा किया है कि ये सांसद एक साथ भाजपा में शामिल होंगे, जबकि अन्य सांसदों ने इस पर सवाल उठाए हैं। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की सच्चाई और दलबदल कानून का क्या प्रभाव पड़ेगा।
 

भाजपा में शामिल होने की चर्चा


नई दिल्ली। ममता बनर्जी की पार्टी से अलग हुए 20 सांसदों में से 17 के भाजपा में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और कई सांसदों ने इस खबर का खंडन किया है। कूच बिहार के सांसद जगदीश चंद बसुनिया ने कहा है कि तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों में से 17 भाजपा में शामिल होंगे, जबकि बाकी तीन सांसद बाहर से भाजपा का समर्थन करेंगे।


सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस छोड़कर नेशनल सिटीजंस पार्टी इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हुए 20 सांसदों में से 17 अक्टूबर में दुर्गा पूजा के दौरान या उसके बाद भाजपा में शामिल होंगे। रविवार को कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में बसुनिया ने दावा किया कि ये सांसद एक साथ भाजपा में शामिल होंगे। उनका कहना है कि चूंकि 20 सदस्यों में से दो तिहाई से अधिक सांसद भाजपा में जाएंगे, इसलिए दलबदल कानून उन पर लागू नहीं होगा।


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम चार मई को आए थे, जिसमें ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई थी। इसके बाद 14 जून को ममता के 28 में से 20 सांसदों ने उनका साथ छोड़ दिया था। इन सांसदों ने त्रिपुरा की स्थानीय पार्टी एनसीपीआई में विलय किया और एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया। अब ये सांसद सीधे भाजपा में शामिल होने की योजना बना रहे हैं।


दलबदल करने वाले 20 सांसदों में से तीन, अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान, भाजपा में शामिल हुए बिना बाहर से एनडीए का समर्थन करेंगे। हालांकि, बसुनिया के इस बयान की अन्य सांसदों ने पुष्टि नहीं की है। सांसद शताब्दी रॉय ने कहा कि फिलहाल किसी ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है और बसुनिया का यह बयान व्यक्तिगत है।


एक अन्य सांसद अबू ताहेर खान ने भी कहा कि बसुनिया को सभी सांसदों की ओर से बोलने का अधिकार नहीं है। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी इस दावे से दूरी बनाई है। उन्होंने कहा कि केवल इच्छा जताने से कोई व्यक्ति भाजपा में शामिल नहीं होता।