पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: भाजपा ने मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में बढ़ाई पकड़
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों का असर
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों ने राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। 4 मई को जारी रुझानों ने सभी को चौंका दिया है, क्योंकि शुरुआती आंकड़ों में भाजपा को स्पष्ट बढ़त मिलती दिख रही है। दोपहर 12 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा 185 सीटों पर आगे है, जबकि तृणमूल कांग्रेस 99 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और अन्य दल 6 सीटों पर आगे चल रहे हैं। इस स्थिति में मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्रों की सीटों पर चर्चा सबसे अधिक हो रही है।
पश्चिम बंगाल में जिन सीटों पर 30 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम जनसंख्या है, वे हमेशा से चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण रही हैं। आमतौर पर ये सीटें टीएमसी के लिए मजबूत मानी जाती थीं, लेकिन इस बार के रुझानों में इन क्षेत्रों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जिससे राजनीतिक विश्लेषक हैरान हैं।
मुर्शिदाबाद में भाजपा की बढ़त
मुर्शिदाबाद जिले की सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है। भाजपा के उम्मीदवार गौरी शंकर घोष लगभग 35 हजार से अधिक वोटों की बढ़त के साथ आगे चल रहे हैं, जबकि टीएमसी की शाओनी सिंघा रॉय उनसे काफी पीछे हैं। यह स्थिति इस क्षेत्र में बदलते रुझानों का संकेत देती है।
हबीबपुर सीट पर भाजपा की स्थिति
हबीबपुर सीट पर भी भाजपा ने बढ़त बनाई हुई है। पार्टी के उम्मीदवार जॉयल मुर्मू करीब 28 हजार वोटों से आगे हैं, जबकि टीएमसी के अमल किस्कू पीछे चल रहे हैं। यह परिणाम दिखाता है कि भाजपा ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की है।
मानबाजार में कांटे की टक्कर
मानबाजार सीट पर भाजपा उम्मीदवार मयना मुर्मू बढ़त बनाए हुए हैं। हालांकि यहां मुकाबला थोड़ा करीबी है, लेकिन टीएमसी उम्मीदवार संध्या रानी टुडू पीछे चल रही हैं। इस सीट पर परिणाम आखिरी समय तक बदल सकते हैं।
सुवेंदु अधिकारी का बयान
मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भाजपा की बढ़त को लेकर विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि दक्षिण बंगाल के इन इलाकों में मुस्लिम वोट अब पहले की तरह एकतरफा नहीं रहे हैं। वोटों के बंटवारे का फायदा भाजपा को मिल रहा है।
मुस्लिम वोटों में बदलाव के संकेत
अधिकारी के अनुसार, मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में यह बदलाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि पहले जहां मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा टीएमसी के पक्ष में जाता था, अब उसमें कमी आई है और वोट अलग-अलग दिशाओं में बंट रहे हैं।
मतदाता सूची में बदलाव का असर
इस बदलाव के पीछे एक और महत्वपूर्ण कारण मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) माना जा रहा है। इस प्रक्रिया के दौरान कई नाम मतदाता सूची से हटाए गए, खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में। इसका असर चुनावी नतीजों पर साफ नजर आ रहा है।
राजनीति में संभावित बदलाव
इन रुझानों से यह स्पष्ट है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जिन सीटों को पहले टीएमसी का गढ़ माना जाता था, वहां अब भाजपा मजबूत चुनौती पेश कर रही है। आने वाले अंतिम नतीजे राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे और यह चुनाव लंबे समय तक चर्चा में रहेगा।