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पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा का नया रणनीतिक कदम

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने अपनी रणनीति को और मजबूत करने के लिए नीति आयोग में नई नियुक्तियाँ की हैं। अशोक लाहिड़ी को उपाध्यक्ष और गोवर्धन दास को सदस्य बनाया गया है। इन नियुक्तियों की समय सीमा चुनावी माहौल में भाजपा के माइक्रो मैनेजमेंट को दर्शाती है। जानें इस राजनीतिक कदम के पीछे की कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

भाजपा का माइक्रो मैनेजमेंट

भारतीय जनता पार्टी चुनावों के दौरान, चाहे वह लोकसभा हो या राज्य विधानसभा, अपने माइक्रो मैनेजमेंट के लिए जानी जाती है। वर्तमान में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, और इस दौरान पार्टी के साथ-साथ केंद्र सरकार की पूरी मशीनरी चुनाव को प्रभावित करने में जुटी हुई है। पुराने मामलों में नए छापे डाले जा रहे हैं, और नेताओं तथा उम्मीदवारों से पूछताछ की जा रही है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री राज्य में सक्रिय रूप से मौजूद हैं। इसी माइक्रो मैनेजमेंट के तहत एक नया कदम उठाया गया है।


नीति आयोग में नई नियुक्तियाँ

पश्चिम बंगाल के एक प्रमुख आर्थिक विशेषज्ञ और वैज्ञानिक को नीति आयोग में शामिल किया गया है। प्रसिद्ध आर्थिक विशेषज्ञ अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे पहले केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं और वर्तमान में पश्चिम बंगाल में भाजपा के विधायक हैं। दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले उनकी नीति आयोग में नियुक्ति की घोषणा की गई है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि प्रधानमंत्री नीति आयोग के पदेन अध्यक्ष होते हैं।


गोवर्धन दास की नियुक्ति

लाहिड़ी के साथ-साथ वैज्ञानिक गोवर्धन दास को भी नीति आयोग का सदस्य बनाया गया है। वे वर्तमान में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर), भोपाल के निदेशक हैं। दोनों की योग्यता पर सवाल उठाए बिना, यह कहा जा सकता है कि उनकी नियुक्तियों की समय सीमा बेहद महत्वपूर्ण है। भाजपा इस तरह की नियुक्तियों से सकारात्मक राजनीतिक संदेश बनाने में माहिर है।