पश्चिम बंगाल चुनावों में भाजपा की जीत: बांग्लादेश फैक्टर की भूमिका
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा ने बांग्लादेश से सटे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। इस चुनावी सफलता में 'बांग्लादेश फैक्टर' की भी अहम भूमिका रही है, जहां हाल की हिंसा ने हिंदू मतदाताओं को एकजुट किया। बांग्लादेशी मीडिया भी इन चुनावों पर नजर रखे हुए है, और भारतीय चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। जानें इस चुनावी घमासान का क्या प्रभाव पड़ेगा।
May 4, 2026, 19:19 IST
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा की सफलता
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बांग्लादेश से सटे कई जिलों में शानदार जीत दर्ज की है। यह परिणाम राज्य में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता का संकेत है, जिसमें 'बांग्लादेश फैक्टर' की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हाल ही में बांग्लादेश में हुई हिंसा के बाद, जहां शेख हसीना की सरकार को हटाया गया, इस्लामी ताकतों ने वहां नियंत्रण स्थापित कर लिया। मुहम्मद यूनुस के 18 महीने के शासन में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस्लामी गतिविधियों के पश्चिम बंगाल में फैलने की आशंका ने हिंदुओं को एकजुट होने में मदद की है। पश्चिम बंगाल में हिंदू मतदाता कभी एकजुट होकर मतदान नहीं करते थे, लेकिन भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने इस बार उन्हें एकजुट करने में सफलता पाई है।
बांग्लादेश में चुनावी घटनाक्रम पर नजर
पश्चिम बंगाल में हो रहे चुनावों पर बांग्लादेश में भी ध्यान दिया जा रहा है, जहां मीडिया संस्थान मतगणना की प्रक्रिया को व्यापक रूप से कवर कर रहे हैं। ढाका ट्रिब्यून ने बताया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा (293 सीटें) सहित पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चुनावों के लिए मतगणना जारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन चुनावों के परिणाम भारत के राजनीतिक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। बांग्लादेश के स्थानीय अखबार, प्रथम आलो में एक विश्लेषणात्मक लेख प्रकाशित हुआ है, जिसका शीर्षक है- 'पश्चिम बंगाल चुनाव: सिर्फ राज्य का नहीं बल्कि भारतीय गणतंत्र का भविष्य भी संकट में है।'
बांग्लादेशी मीडिया की प्रतिक्रिया
बंगाल के चुनावी परिदृश्य पर उठते सवाल अब बांग्लादेश के मीडिया में भी चर्चा का विषय बन गए हैं। 'द डेली स्टार' में प्रकाशित एक लेख ने भारतीय चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अखबार का कहना है कि भारत के चुनाव आयोग का गौरवशाली इतिहास अब धुंधला पड़ गया है। लेख में मतदाता सूची संशोधन की 'SIR' (स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू) प्रक्रिया की आलोचना की गई है, जिसमें कहा गया है कि इसके क्रियान्वयन ने वोटरों को निराश किया है।
भाजपा के मुस्लिम नैरेटिव पर सवाल
बांग्लादेशी अखबार ने भाजपा के 'मुस्लिम नैरेटिव' पर भी सवाल उठाए हैं। लेख में शुभेंदु अधिकारी के बयानों का जिक्र है, जिसमें उन्होंने कहा था कि बंगाल में लगभग एक करोड़ बांग्लादेशी मुसलमान और रोहिंग्या रह रहे हैं। 'द डेली स्टार' ने इस दावे की तार्किकता पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि इतनी बड़ी आबादी राज्य में कैसे मौजूद है। इसके अलावा, अखबार ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों और चुनावी कवायद के बावजूद, चुनाव आयोग ने एक भी घुसपैठिए की पहचान नहीं की है। हालांकि, अखबार ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को भी आड़े हाथों लिया है, यह कहते हुए कि पार्टी पर भी गंभीर आरोप हैं।