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पश्चिम बंगाल में TMC विधायक पर हमले की बढ़ती घटनाएं

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है, जहां TMC विधायक मदन मित्रा की कार पर अंडे और ईंटें फेंकी गईं। यह घटना उस समय हुई जब वह स्थानीय निवासियों से बातचीत कर रहे थे। जानें इस हमले के पीछे की वजहें और राज्य में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बारे में।
 

राजनीतिक तनाव में वृद्धि


नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसी संदर्भ में, शनिवार को कमरहाटी से TMC विधायक मदन मित्रा की कार पर अंडे और ईंटें फेंके जाने की घटना सामने आई है।


मदन मित्रा की प्रतिक्रिया

सूत्रों के अनुसार, मदन मित्रा अपने विधायक कार्यालय में बैठक कर रहे थे, जब उन्हें सूचना मिली कि वार्ड नंबर 14 के एक पार्षद पर कुछ लोगों ने हमला किया है। इसके बाद, वह तुरंत उस क्षेत्र में पहुंचे और प्रभावित लोगों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लेने लगे।


TMC MLA Madan Mitra now under egg attack at Kamarhati. He was inside car and drove away pic.twitter.com/eg1ckmgQYK

— Sudhanidhi Bandyopadhyay (@SudhanidhiB) June 6, 2026



हमले का विवरण

मदन मित्रा ने क्या बताया?


मदन मित्रा ने कहा कि जब वह हमले से प्रभावित घरों की जानकारी जुटा रहे थे, तभी कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें चेतावनी दी कि 100 से 150 युवाओं का एक समूह इलाके में घूम रहा है। आरोप है कि इन युवाओं ने केसरिया स्कार्फ पहन रखे थे और जय श्री राम के नारे लगा रहे थे।


इसके बाद, माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। उपद्रवियों के एक समूह ने उनकी कार को निशाना बनाते हुए अंडे और ईंटें फेंकीं। राहत की बात यह रही कि घटना के समय मदन मित्रा कार के अंदर नहीं थे। हालांकि, आरोप है कि कार आगे बढ़ने के बाद उनके ड्राइवर के साथ मारपीट की गई। इस घटना के बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया, जिसके चलते पुलिस और प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी है.


पिछली घटनाएं

इससे पहले की क्या है घटना?


हाल के दिनों में TMC नेताओं के खिलाफ विरोध की कई घटनाएं सामने आई हैं। कुछ समय पहले अभिषेक बनर्जी को विरोध प्रदर्शन के दौरान काले झंडे दिखाए गए थे और उन पर अंडे फेंके गए थे। सुरक्षा कर्मियों को उन्हें भीड़ से सुरक्षित निकालना पड़ा था। इसी तरह, जयप्रकाश मजूमदार को भी विरोध का सामना करना पड़ा था और उनके खिलाफ नारेबाजी की गई थी.