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पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग का बड़ा कदम, मुख्य सचिव और IPS अधिकारियों का तबादला

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव और चार IPS अधिकारियों का तबादला कर दिया है। इस सख्त कदम से ममता बनर्जी की सरकार में हड़कंप मच गया है। आयोग ने अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया से दूर रखने का आदेश दिया है। टीएमसी ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए संसद में वॉकआउट किया। जानें इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में और क्या है इसके पीछे की कहानी।
 

चुनाव आयोग की सख्त कार्रवाई

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही चुनाव आयोग ने सक्रियता दिखाते हुए ममता बनर्जी की सरकार को एक बड़ा झटका दिया है। आयोग ने रातों-रात राज्य के मुख्य सचिव और गृह सचिव को उनके पदों से हटा दिया है। इसके साथ ही कोलकाता पुलिस कमिश्नर समेत चार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का भी तबादला किया गया है।


नए पदों पर तैनाती

आधी रात को छिने पद, इन 4 IPS अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी

चुनाव आयोग के इस कठोर निर्णय के बाद बंगाल के पुलिस विभाग में हलचल मच गई है। आयोग के निर्देशानुसार, 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी सिद्ध नाथ गुप्ता को महानिदेशक एवं सूचना एवं पुलिस प्रमुख (प्रभारी) के रूप में नियुक्त किया गया है। 1991 बैच के नटराजन रमेश बाबू को सुधारात्मक सेवाओं का महानिदेशक बनाया गया है। इसके अलावा, आईपीएस अजय मुकुंद रानाडे को उप महानिदेशक एवं सूचना एवं पुलिस प्रमुख (कानून एवं व्यवस्था) और अजय कुमार नंद को कोलकाता पुलिस का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन आदेशों को तुरंत लागू किया जाए और 16 मार्च तक अधिकारियों के कार्यभार ग्रहण करने की रिपोर्ट दिल्ली भेजी जाए।


प्रशासनिक बदलाव

शीर्ष IAS अधिकारी भी नपे, चुनाव से जुड़े किसी भी काम पर लगी रोक

पुलिस अधिकारियों के अलावा, राज्य के दो प्रमुख प्रशासनिक पदों पर भी आयोग की कार्रवाई हुई है। चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को हटाकर 1993 बैच के आईएएस अधिकारी दुष्यंत नारियाला को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। इसी तरह, गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को हटाकर 1997 बैच की आईएएस अधिकारी संघमित्रा घोष को गृह और पहाड़ी मामलों का प्रधान सचिव बनाया गया है। इन आदेशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि हटाए गए अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी चुनावी कार्य से दूर रखा जाएगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पहले ही स्पष्ट किया था कि बंगाल में हिंसा-मुक्त चुनाव कराना उनकी प्राथमिकता है।


TMC का विरोध

चुनाव आयोग के फैसले से भड़की TMC, संसद से किया वॉकआउट

चुनाव आयोग की इस आधी रात की कार्रवाई पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने तीव्र प्रतिक्रिया दी है। टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि सुबह 4 बजे राज्य के शीर्ष अधिकारियों का तबादला करना अस्वीकार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में ममता बनर्जी की चुनी हुई सरकार है और चुनाव आयोग अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहा है। टीएमसी ने इस मुद्दे को संसद में भी उठाया और पार्टी नेता डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में विरोध करते हुए संसद से वॉकआउट किया।