पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर बगावत: ममता बनर्जी की चुनौती
पार्टी में असंतोष का उभरना
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के हालिया विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली हार ने पार्टी के भीतर असंतोष को उजागर कर दिया है। ममता बनर्जी, जो पिछले 15 वर्षों से राज्य की सत्ता में हैं, को इस बार केवल 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा। हार के बाद, टीएमसी के 58 विधायकों ने नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी है, जिससे पार्टी की एकता पर सवाल उठने लगे हैं।
बागी विधायकों का नया धड़ा
संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी विधायकों ने एक मजबूत गुट बना लिया है। इस समूह ने विधानसभा में अपनी ताकत दिखाते हुए ऋतब्रत बनर्जी को आधिकारिक रूप से विपक्ष का नेता घोषित किया है। विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस निर्णय को मान्यता दे दी है, जिससे ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है।
सांसदों में संभावित विद्रोह
कोलकाता में राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, विधायकों के विद्रोह के बाद पार्टी के सांसदों में भी टूट की संभावना बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, टीएमसी के लगभग 23 सांसद बागी नेताओं के संपर्क में हैं, और यह अफवाह है कि इनमें से 20 सांसद जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो सकते हैं।
ऋतब्रत बनर्जी का रहस्यमय बयान
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच, ऋतब्रत बनर्जी ने मीडिया से कहा कि धैर्य रखें, आने वाले दिनों में कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले सात दिनों से उनकी किसी सांसद से बातचीत नहीं हुई है।
अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर नाराजगी
विश्लेषकों का मानना है कि इस बगावत का मुख्य कारण राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली से वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी है। लोकसभा में टीएमसी के 28 सदस्य हैं, और बागी धड़े को दल-बदल कानून से बचने के लिए कम से कम 19 सांसदों का समर्थन चाहिए। राज्यसभा में, 13 सांसदों में से 9 सांसदों का समर्थन आवश्यक होगा।
ममता बनर्जी की आपात बैठक
टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने पार्टी की स्थिति को देखते हुए कोलकाता में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं, सांसदों और रणनीतिकारों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।