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पश्चिम बंगाल में टीएमसी में इस्तीफों की बाढ़, ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रमुख ममता बनर्जी को हाल ही में दो प्रवक्ताओं के इस्तीफे का सामना करना पड़ा है। डॉ. शांतनु सेन और अरूप चक्रवर्ती के इस्तीफों ने पार्टी में असंतोष की स्थिति को उजागर किया है। सेन ने पार्टी के भीतर बढ़ते विवादों और भ्रष्टाचार के कारण इस्तीफा दिया, जबकि चक्रवर्ती ने निजी कारणों का हवाला दिया। इसके अलावा, सांसद काकोली घोष ने लोकसभा स्पीकर को शिकायत भेजकर पार्टी के अंदरूनी विवाद को सार्वजनिक कर दिया है। जानें इस राजनीतिक उथल-पुथल के पीछे की कहानी।
 

टीएमसी में इस्तीफों की स्थिति


पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी को लगातार झटके मिल रहे हैं। पार्टी में हो रहे इस्तीफों के कारण भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हाल ही में, पूर्व सांसद डॉ. शांतनु सेन ने राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद, अरूप चक्रवर्ती ने भी प्रवक्ता पद छोड़ने का निर्णय लिया। एक ही दिन में दो प्रवक्ताओं के इस्तीफे से टीएमसी में निराशा का माहौल है।


शांतनु सेन का इस्तीफा

डॉ. शांतनु सेन ने ममता बनर्जी को भेजे अपने इस्तीफे में कहा कि कई मुद्दों पर सहमति न होने के बावजूद उन्होंने पार्टी का समर्थन किया, लेकिन अब ऐसा करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और अन्य मुद्दों के कारण जनता ने उन्हें नकार दिया है, जिससे वह राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी नहीं संभाल सकते।


अरूप चक्रवर्ती का इस्तीफा

अरूप चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे में कोई विशेष कारण नहीं बताया, केवल इतना कहा कि वह निजी कारणों से पद पर नहीं रह सकते। हालांकि, उन्होंने पार्टी के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाया।


काकोली घोष का विवाद

टीएमसी की विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ता जा रहा है। 100 से अधिक पार्षद पार्टी छोड़ चुके हैं और कई विधायक और सांसद भी इसी दिशा में हैं। बारासात लोकसभा सीट से सांसद काकोली घोष दस्तीकार ने लोकसभा स्पीकर को शिकायत भेजकर पार्टी के अंदरूनी विवाद को सार्वजनिक कर दिया है। यह माना जा रहा है कि काकोली सांसदों के एक बड़े समूह के साथ बीजेपी में शामिल हो सकती हैं।