पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सांसद के खिलाफ कानूनी नोटिस का विवाद
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भेजा गया कानूनी नोटिस
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में एक नया विवाद उभरा है। बारासात से तृणमूल कांग्रेस के सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तिदार के बेटे, मनोचिकित्सक डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तिदार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के चार अन्य वरिष्ठ नेताओं को कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस में उन्होंने अपने और अपने परिवार के खिलाफ दिए गए कथित बयानों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक माफी की मांग की है।
डॉ. बैद्यनाथ की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर सवाल
डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तिदार ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने कभी भी बारासात विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने या पार्टी से टिकट प्राप्त करने की इच्छा नहीं जताई। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने के संबंध में किए गए दावे पूरी तरह से झूठे और भ्रामक हैं। उनका आरोप है कि कुछ नेताओं ने उनके बारे में गलत जानकारी फैलाकर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया है।
कानूनी नोटिस में क्या कहा गया?
इस कानूनी नोटिस में यह दावा किया गया है कि इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आईपैक) और बारासात जिला टीएमसी के पूर्व अध्यक्ष सोहम पाल ने उनसे कई बार संपर्क किया था। नोटिस के अनुसार, व्हाट्सएप संदेशों और फोन कॉल के माध्यम से उन्हें चुनाव लड़ने और विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। इसलिए, टिकट मांगने के आरोपों का कोई आधार नहीं है।
डॉ. बैद्यनाथ की नाराजगी का कारण
डॉ. बैद्यनाथ ने पूर्व विधायक सोनाली गुहा के उस बयान पर भी नाराजगी जताई है, जिसमें कहा गया था कि वह, उनके भाई और उनकी मां नियमित रूप से शराब का सेवन करते हैं। उन्होंने इस आरोप को निराधार और अपमानजनक बताया है। उनका कहना है कि ऐसे बयान न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि उनके पेशेवर जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
नोटिस में सभी नेताओं को क्या निर्देश दिए गए?
एडवोकेट पूजा शुक्ला के माध्यम से भेजे गए इस नोटिस में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, सांसद कल्याण बनर्जी, सांसद सौगत रॉय, सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व विधायक सोनाली गुहा को संबोधित किया गया है। नोटिस में सभी नेताओं से कहा गया है कि वे भविष्य में डॉ. बैद्यनाथ और उनके परिवार के खिलाफ किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से बचें।
इसके अलावा, नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी गई और कथित बयान वापस नहीं लिए गए, तो डॉ. बैद्यनाथ सिविल और आपराधिक मानहानि सहित सभी कानूनी विकल्पों का सहारा लेंगे। इस घटनाक्रम ने टीएमसी के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान को एक नया मोड़ दे दिया है और आने वाले दिनों में इस मामले पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।