पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण में चुनाव आयोग की चुनौतियाँ
चुनाव आयोग की नई चुनौतियाँ
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कई समस्याओं का सामना किया है। विशेष रूप से, जिन मतदाताओं के नाम विचाराधीन श्रेणी में रखे गए थे, उनकी दस्तावेजों की जांच करने में आयोग को काफी कठिनाई हुई। पहले यह तय किया गया था कि पहली पूरक मतदाता सूची शनिवार, 21 मार्च को जारी की जाएगी, लेकिन शाम तक कोई सूची नहीं आई। इसके बाद यह जानकारी मिली कि अब यह सूची सोमवार, 23 मार्च को जारी की जाएगी। इस बार आयोग पर दबाव था क्योंकि नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने आधी रात के ठीक पहले पूरक मतदाता सूची जारी की। आयोग ने केवल यह बताया कि उसने 29 लाख नामों की जांच की है, लेकिन यह नहीं बताया गया कि कितने नाम हटाए गए हैं। अब मतदाता खुद पता लगाने के लिए मजबूर हैं कि उनके नाम सूची में हैं या नहीं। यह स्थिति चिंताजनक है। जानकार सूत्रों के अनुसार, शनिवार को ईद के कारण आयोग ने सूची जारी करने में देरी की, क्योंकि अधिकारियों को चिंता थी कि अगर मुस्लिम मतदाताओं के नाम कटने की खबर आई तो विवाद उत्पन्न हो सकता है। यह स्थिति आयोग की गोलमोल जवाब देने की प्रवृत्ति को दर्शाती है।