पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी को झटका, 60 विधायक अलग हुए
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल
पश्चिम बंगाल में एक नई राजनीतिक स्थिति उभर रही है। भाजपा के पास 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें हैं, जबकि मुख्य विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस के पास 80 सीटें हैं। ममता बनर्जी की पार्टी को एक मजबूत विपक्ष के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन अब उनकी स्थिति कमजोर होती नजर आ रही है। हाल ही में, लगभग 60 विधायक पार्टी से अलग हो गए हैं और उन्होंने स्पीकर से अलग गुट के रूप में मान्यता प्राप्त कर ली है। स्पीकर ने तृणमूल से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी है।
ऋतब्रत बनर्जी ने बगावत के बावजूद ममता बनर्जी को पार्टी का अध्यक्ष बताया है, लेकिन यह एक तकनीकी स्थिति है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका गुट रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएगा और जरूरत पड़ने पर सरकार का विरोध भी करेगा, लेकिन जहां सरकार अच्छा काम करेगी, वहां उसका समर्थन भी किया जाएगा। इस प्रकार, उन्होंने स्पष्ट किया है कि अब पश्चिम बंगाल का विपक्ष भी सरकार के साथ खड़ा है।
कहा जा रहा है कि ऋतब्रत बनर्जी में विधायक जुटाने की क्षमता नहीं थी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस स्थिति को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चूंकि वे लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस में रहे हैं, उन्होंने विधायकों को ऋतब्रत और संदीपन साहा के साथ जोड़ा। इस प्रकार, अब पश्चिम बंगाल में सरकार और विपक्ष दोनों भाजपा के पक्ष में हैं। यदि इस गुट को पार्टी की मान्यता मिलती है, तो उनका एनडीए में शामिल होना केवल समय की बात होगी। इसके बाद, जो विधायक बचेंगे, उन्हें मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा नहीं मिल पाएगा।