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पश्चिम बंगाल में राजनीतिक आरोपों का नया दौर: भाजपा और तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने

पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोपों का नया दौर शुरू हो गया है। भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस की 15 साल की सरकार के खिलाफ आरोपपत्र पेश किया, जिसके जवाब में तृणमूल ने भी भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। महुआ मोइत्रा ने मणिपुर में जातीय हिंसा पर अमित शाह से सवाल उठाए, जबकि ममता बनर्जी ने भाजपा पर मतदाता सूची में हेरफेर का आरोप लगाया। जानें इस राजनीतिक संघर्ष के पीछे की कहानी।
 

राजनीतिक आरोपों का आदान-प्रदान

कोलकाता। भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की 15 साल की शासनकाल के खिलाफ एक आरोपपत्र प्रस्तुत किया। इसके तुरंत बाद, तृणमूल कांग्रेस ने भी भाजपा के खिलाफ एक आरोपपत्र जारी किया। तृणमूल कांग्रेस के इस आरोपपत्र में भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने मणिपुर में जातीय हिंसा के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा, यह कहते हुए कि पिछले तीन वर्षों से पूर्वोत्तर राज्य में खून बह रहा है।


महुआ मोइत्रा ने कहा, 'भाजपा बंगाल में अपने नफरत भरे असम शैली के नजरबंदी शिविर मॉडल को लाने के लिए बंगाली और बांग्लादेशियों के बीच की रेखा को धुंधला करना चाहती है।' दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को पश्चिम बर्धमान जिले के खनन शहर में एक रैली के दौरान कहा, 'भाजपा बंगाल को बर्बाद करने की कोशिश कर रही है, और इसके परिणामस्वरूप वह पूरे देश में सत्ता खो देगी।' उन्होंने चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाया कि वह भाजपा के इशारे पर मतदाता सूची से नाम हटाने का कार्य कर रहा है। ममता बनर्जी ने चेतावनी दी, 'लक्ष्मण रेखा होनी चाहिए, लेकिन भाजपा सारी सीमाएं पार कर रही है। एसआईआर तुम्हारे लिए मौत की घंटी साबित होगा।'