पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव: रिकॉर्ड तोड़ मतदान ने सबको चौंकाया
पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग
नई दिल्ली: 23 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग हुई, जिसने सभी को हैरान कर दिया। इस बार मतदान ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस राज्य में अब तक की सबसे अधिक मतदान प्रतिशत दर्ज की गई है।
बंगाल में बंपर वोटिंग का रिकॉर्ड
जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में वोटरों ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। 23 अप्रैल को शाम 5 बजे तक 152 सीटों पर 89.93% मतदान हुआ।
यह आंकड़ा 90% के करीब पहुंच गया, जो बंगाल के चुनावी इतिहास में सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे पहले 2021 में 82.30%, 2016 में 83.02% और 2011 में 84.72% वोटिंग हुई थी। यह पहली बार है जब राज्य में मतदान 90% के पार पहुंचा है।
तमिलनाडु में भी दिखा वोटरों का उत्साह
पश्चिम बंगाल के साथ-साथ तमिलनाडु में भी मतदान में जोरदार भागीदारी देखने को मिली। वहां 234 सीटों पर 82.24% मतदान हुआ। 2021 में यह आंकड़ा 72.73%, 2016 में 74.24% और 2011 में 78.01% था। यह स्पष्ट है कि इस बार दोनों राज्यों में वोटरों ने सक्रियता से भाग लिया।
ममता बनर्जी ने जताया जनता का गुस्सा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस भारी मतदान को जनता के गुस्से का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने SIR के खिलाफ वोट दिया है। ममता का इशारा चुनाव आयोग की विशेष समीक्षा प्रक्रिया की ओर था, जिसका TMC लगातार विरोध कर रही है। उन्होंने कहा, "लोगों ने वोट के माध्यम से संदेश दिया है कि उन्हें केवल राज्य नहीं, बल्कि केंद्र से भी बीजेपी को हटाना है।"
सीएम ममता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी आरोप लगाया कि वह वोटिंग के दिन कोलकाता में बैठकर अधिकारियों को डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं। ममता का कहना था कि केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "आज बड़ी संख्या में वोट डालने वाले लोग बीजेपी की साजिशों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।"
रिकॉर्ड तोड़ मतदान का महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि 90% के करीब वोटिंग कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का मतदान किसी बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है। 2011 में ममता की ऐतिहासिक जीत के समय भी 84.72% वोट पड़े थे, और इस बार का आंकड़ा उससे 5% अधिक है।
विपक्ष इसे एंटी-इनकंबेंसी के रूप में देख रहा है, जबकि TMC इसे ममता बनर्जी पर विश्वास की मुहर मान रही है। पहले चरण की यह वोटिंग बाकी चरणों के लिए भी माहौल तय करेगी। अब सभी की नजर 152 सीटों के परिणामों पर है कि यह बंपर वोटिंग किसके पक्ष में गई।