पाकिस्तान का ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने का संकेत
मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव
मध्य-पूर्व में हालात अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं, जहां से वापसी का रास्ता केवल विनाश की ओर जाता है। ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच चल रही लड़ाई में अब पाकिस्तान एक नया और खतरनाक खिलाड़ी बनकर उभर सकता है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री इसहाक डार के हालिया बयान ने वैश्विक समुदाय को चौंका दिया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान ईरान के खिलाफ युद्ध में औपचारिक रूप से शामिल हो सकता है।
सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता
पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपने द्विपक्षीय रक्षा समझौते का हवाला देते हुए संकेत दिया है कि उसे ईरान के खिलाफ बढ़ते संघर्ष में शामिल किया जा सकता है। रियाद उन खाड़ी देशों में से एक है, जिन्हें ईरान ने कई मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, डार ने अपने ईरानी समकक्ष को चेतावनी दी है कि सऊदी क्षेत्र पर हमले शुरू करने से बचें।
सुरक्षा समझौते का महत्व
डार ने कहा, "मैंने ईरान को बताया कि हमारे बीच एक रक्षा समझौता है।" यह पहली बार है जब किसी पाकिस्तानी अधिकारी ने ईरान युद्ध के संदर्भ में इस समझौते की सक्रियता की पुष्टि की है। यह समझौता NATO-शैली के ढांचे पर आधारित है, जिसमें एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाता है।
ईरान-इज़राइल संघर्ष में वृद्धि
गुरुवार को ईरान द्वारा इज़राइल पर मिसाइलों के हमले के बाद मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ गया है। यह हमला एक अमेरिकी सबमरीन द्वारा एक ईरानी युद्धपोत को डुबोने के बाद हुआ, जिसके बाद ईरान ने क्षेत्र में व्यापक नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।
ईरानी नेतृत्व की चुनौतियाँ
ईरान पर हमलों की तीव्रता इतनी बढ़ गई है कि सरकारी टेलीविज़न ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शोक समारोह को स्थगित करने की घोषणा की। यह घटना 1989 में अयातुल्ला खुमैनी के अंतिम संस्कार के दौरान हुए बड़े पैमाने पर शोक के समान बताई जा रही है।