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पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका-ईरान सीजफायर: नोबेल पुरस्कार की मांग

अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में घोषित सीजफायर ने वैश्विक स्तर पर राहत की लहर दौड़ाई है। पाकिस्तान ने इस मामले में मध्यस्थता का श्रेय लेने की कोशिश की है, जिसके चलते वहां के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लिए नोबेल पुरस्कार की मांग उठाई जा रही है। हालांकि, लेबनान पर इजरायल के हमले के बाद सीजफायर के टूटने का खतरा भी बना हुआ है। जानें इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में और क्या है पाकिस्तान की भूमिका।
 

अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा

अमेरिका-ईरान सीजफायर: ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की घोषणा ने वैश्विक स्तर पर राहत की लहर दौड़ा दी है। इस बीच, पाकिस्तान ने इस मामले में मध्यस्थता का श्रेय लेने की कोशिश की है, जिसके चलते वहां के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लिए नोबेल पुरस्कार की मांग उठाई जा रही है। हालांकि, लेबनान पर इजरायल के हमले के बाद सीजफायर के टूटने का खतरा भी बना हुआ है।


पाकिस्तान, अमेरिका के इशारे पर ईरान के साथ सीजफायर के लिए बातचीत में मध्यस्थता कर रहा था। वहीं, चीन ने ईरान को मनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा की। लेकिन अब पाकिस्तानी मीडिया और अन्य संस्थाएं इस सफलता का पूरा श्रेय पाकिस्तान सरकार को दे रही हैं।


पाकिस्तान के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल सैयद अहमद नदीम कादरी ने एक लेख में कहा है कि पाकिस्तान ने संभावित बड़े युद्ध को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका निभाई। कादरी ने लिखा, 'पाकिस्तान ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और बाजारों को स्थिर करने में मदद की है और सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति को प्राथमिकता दी है।'


कादरी ने आगे कहा कि पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदम नोबेल शांति पुरस्कार की भावना के अनुरूप हैं। कराची चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (KCCI) ने भी इस सीजफायर को पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के प्रयासों का परिणाम बताया। पाकिस्तानी मीडिया ने इस मुद्दे को उठाया है कि इस युद्धविराम में पाकिस्तान की मध्यस्थता महत्वपूर्ण रही है और इसके लिए शहबाज और मुनीर को नोबेल पीस प्राइज मिलना चाहिए।