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पाकिस्तान की वायु सेना का यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ उपयोग

पाकिस्तान की वायु सेना यमन में ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ हमलों में सक्रिय है। इस्लामाबाद ने हाल ही में सऊदी अरब को सैन्य सहायता बढ़ाई है, जिससे उसकी सैन्य भूमिका में विस्तार हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिक पहले से तैनात हैं, और यह स्थिति मक्का रक्षा समझौते के तहत विकसित हुई है। जानें इस समझौते के पीछे की रणनीति और पाकिस्तानी सैनिकों की भूमिका के बारे में अधिक जानकारी।
 

यमन में पाकिस्तान की सैन्य भूमिका

यमन में ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई में पाकिस्तान वायु सेना के लड़ाकू विमानों का उपयोग किया जा रहा है। हाल ही में, इस्लामाबाद ने मक्का रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब को सैन्य सहायता बढ़ाने का निर्णय लिया है। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि हूती विद्रोहियों को निशाना बनाने के लिए पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल हो रहा है। यह घटनाक्रम सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़ते संघर्ष में पाकिस्तान की सैन्य भूमिका को दर्शाता है, क्योंकि हूतियों ने हाल के दिनों में सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं।


सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती

CNN की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सैनिक पहले से ही सऊदी अरब में तैनात हैं। पाकिस्तान के सैन्य मीडिया विंग के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने पुष्टि की कि पाकिस्तानी सेना खाड़ी देश में मौजूद है, लेकिन उन्होंने तैनाती की संख्या या क्षमताओं का खुलासा नहीं किया। यह जानकारी मक्का पैक्ट के सक्रिय होने के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने सामूहिक रक्षा व्यवस्था पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत, किसी भी देश पर होने वाले सशस्त्र हमले को सभी तीन देशों पर हमला माना जाएगा, जिससे सामूहिक सुरक्षा का ढांचा तैयार होता है।


आपातकालीन बैठक और तैनाती

रियाद में तीनों देशों की रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति की आपातकालीन बैठक के बाद, इस हफ्ते इस समझौते को लागू किया गया। सदस्य देशों ने सऊदी अरब के सामने मौजूद खतरों को देखते हुए वहां तेजी से सैन्य बल तैनात करने पर सहमति जताई। अमेरिकी रक्षा विश्लेषक कर्नल डेविड ओ. स्मिथ का अनुमान है कि इस समय सऊदी अरब में लगभग 8,000 पाकिस्तानी सैनिक तैनात हैं। उन्होंने बताया कि इस बल में पाकिस्तान वायु सेना और आर्मी एयर डिफेंस के जवान शामिल हैं, जिनका उपयोग महत्वपूर्ण तेल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में मदद के लिए किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तानी सैनिकों के सीधे ज़मीनी युद्ध में शामिल होने की संभावना कम है, क्योंकि इस्लामाबाद को ईरान के साथ अपने संबंध बनाए रखने की आवश्यकता है।