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पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने से इनकार

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने के खिलाफ अपनी स्थिति को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि उनका देश तब तक इजराइल को मान्यता नहीं देगा जब तक पूर्वी यरुशलम को स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र की राजधानी नहीं बनाया जाता। आसिफ ने विश्वसनीयता के मुद्दे पर भी सवाल उठाए और इजराइल के साथ संबंधों को सामान्य करने के विचार का कड़ा विरोध किया।
 

पाकिस्तान का स्पष्ट रुख

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट किया है कि उनका देश इस्लामाबाद के अब्राहम समझौते में शामिल होकर इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने के पक्ष में नहीं है। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस वक्तव्य के बाद आया है, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ शांति वार्ता में शामिल देशों से अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया था।


यह समझौता इजराइल और अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को स्थापित करने के लिए है। आसिफ ने सोमवार रात ‘समा टीवी’ पर दिए एक साक्षात्कार में कहा, 'व्यक्तिगत रूप से, मुझे नहीं लगता कि हमें किसी ऐसे समझौते में शामिल होना चाहिए जो हमारी मूल विचारधारा के खिलाफ हो।'


समझौते में शामिल देशों की स्थिति

संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन पहले से ही इस समझौते के सदस्य हैं, और ट्रंप को उम्मीद है कि सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किए, मिस्र और जॉर्डन भी इस पर हस्ताक्षर करेंगे। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि उनका देश लंबे समय से इस रुख पर कायम है कि 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र की स्थापना होने तक वह इजराइल को मान्यता नहीं देगा।


उन्होंने कहा, 'हमारा रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि यह हमें स्वीकार नहीं है।' मंत्री ने विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा, 'आप उन लोगों के साथ कैसे बैठेंगे जिनके शब्द पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं किया जा सकता?'


पाकिस्तान का पासपोर्ट और इजराइल

आसिफ ने पाकिस्तान के पासपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिस पर लिखा है कि यह इजराइल की यात्रा के लिए वैध नहीं है। वह उन नेताओं में शामिल हैं जो इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने के किसी भी विचार का कड़ा विरोध करते हैं। पिछले महीने, उन्होंने इजराइल को 'मानवता के लिए अभिशाप' बताया था और उस पर क्षेत्र में नरसंहार करने का आरोप लगाया था।